मैंने आज ही दिल्ली से पटना का टिकट कटवाया था। कोच में बैठकर सोच रहा था, ये शहर मेरे लिए नया था। मेरा नाम आर्यन है, और मैं बी.टेक का छात्र हूँ। गर्मियों की छुट्टियाँ थीं, और मैं अपने कॉलेज के दोस्त, विक्रांत के साथ कुछ दिनों के लिए घूमने आया था। विक्रांत यहीं का रहने वाला था, बिहार का असली ‘लवड़ा’। उसका फोन बजा। “साले, कहाँ फँस गया? स्टेशन के बाहर आ जा।” उसकी आवाज़ में वो पुरानी हल्की-फुल्की गाली थी, जो दोस्तों के बीच प्यार जताने का तरीका होती है।
उसकी ओल्ड बाइक पर बैठकर हम फ्रेज़र रोड के पास उसके किराए के कमरे की तरफ जा रहे थे। शाम हो रही थी। पटना की गर्म हवा चेहरे पर लग रही थी, और गलियों में चाय की दुकानों से निकलती ‘मसालेदार’ पकोड़ों की खुशबू आ रही थी। विक्रांत का कमरा छोटा-सा था, एक तरफ बिस्तर बिछा था, दूसरी तरफ कुछ किताबें और एक लैपटॉप। “यार, यहाँ रातें बड़ी लंबी लगती हैं,” उसने कहा, दो चाय के गिलास निकालते हुए। “कोई प्लान बताओ आज रात का।”
मैंने कंधे उचकाए। “तू ही तो लोकल है। तेरी मर्जी।”
उसकी आँखों में एक चमक आई, वो शैतानी चमक जो मैं कॉलेज के दिनों से पहचानता था। “एक आइडिया है,” उसने धीरे से कहा। “लेकिन तू राज़ रखेगा?”
“बोल ना साले।”
“मैंने एक नंबर लिया है… एक लड़की का। वो… यार, मतलब, ‘सर्विस’ देती है।” उसने अपना फोन निकाला। “मेरे पास पैसे तो नहीं हैं ज्यादा, लेकिन उसने कहा था कि दो लोग हैं तो रेट कम कर देगी। तू चलेगा?”
मेरे गले सूख गया। मैंने ऐसा कुछ कभी नहीं किया था। लेकिन विक्रांत की बातों में एक ‘रोमांच’ था, एक ‘कशिश’। मैंने हाँ में सिर हिला दिया, दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था।
वो लड़की, जिसका नाम प्रिया था, ने कहा कि वो एक घंटे में आएगी। वो समय बीतने लगा। मैं नर्वस था। विक्रांत शांत था, गाने लगा रहा था। फिर दरवाजे की घंटी बजी।
जब मैंने दरवाजा खोला, तो सामने खड़ी लड़की ने मेरी सांसें थाम दीं। वो मेरी उम्मीदों से कहीं ज़्यादा खूबसूरत थी। बटरस्कॉच-ब्राउन स्किन, काले लंबे बाल जो उसके कंधों पर बिखरे हुए थे। उसने एक सिंपल सी नेवी ब्लू कुर्ती और सफ़ेद जींस पहन रखी थी, जो उसके दुबले-पतले पर ‘मस्त’ फिगर पर पर्फेक्ट बैठ रही थी। उसके चेहरे पर हल्का-सा मेकअप था, और आँखें… उसकी आँखें बड़ी और बात करने वाली थीं, एक अजीब सी ‘बेचैनी’ और शांति का मिला-जुला भाव लिए हुए।
“प्रिया?” विक्रांत ने पीछे से आवाज़ दी।
उसने मुस्कुराते हुए हाँ में सिर हिलाया। “तुम विक्रांत हो ना? और ये…?”
“आर्यन, मेरा दोस्त,” विक्रांत ने कहा।
हम अंदर आए। प्रिया ने कमरे को एक नज़र देखा, फिर बिस्तर पर बैठ गई, अपना पर्स साइड में रखते हुए। माहौल थोड़ा अजीब था। विक्रांत ने बात शुरू की, पटना के बारे में, कॉलेज के बारे में। प्रिया शांत होकर सुन रही थी, कभी-कभी मुस्कुराते हुए। मैं भी धीरे-धीरे रिलैक्स होने लगा। उसकी आवाज़ मधुर थी, और वो बात करते समय अपने हाथों से हल्के इशारे करती थी, जो ‘आकर्षण’ को और बढ़ा रहे थे।
कुछ देर बातचीत के बाद, विक्रांत ने खड़े होकर अपनी शर्ट उतारी और बिस्तर पर फेंक दी। उसका इशारा साफ था। प्रिया ने मेरी तरफ देखा, एक सवालिया नज़र से। मेरे मन में कई सवाल घूम रहे थे, लेकिन फिर मैंने भी अपनी टी-शर्ट उतारकर एक तरफ रख दी। कमरे में हवा ‘गरम’ होने लगी थी।
विक्रांत प्रिया के पास बैठ गया और उसके बालों में हल्का सा हाथ फेरा। प्रिया ने आँखें बंद कर लीं। फिर विक्रांत ने उसकी ठुड्डी पकड़ी और धीरे से अपने होंठ उसके होंठों से टकराए। ये कोई जल्दबाज़ी वाला चुंबन नहीं था, बल्कि एक ‘तेज़’ शुरुआत थी, जो धीरे-धीरे गहरा होने लगा। मैं देखता रह गया, मेरे शरीर में एक ‘सिहरन’ दौड़ गई।
फिर विक्रांत ने मेरी तरफ देखा और सिर से इशारा किया। मैं धीरे से उठा और उनके पास गया। प्रिया ने अपनी आँखें खोलीं। उसकी नज़रें मेरे सीने पर टिकी थीं, फिर मेरी आँखों से मिलीं। उसमें एक ‘तड़प’ थी, एक ‘ललक’। विक्रांत ने प्रिया के कान के पास जाकर कुछ ‘फुसफुसाया’। प्रिया ने हल्की सी मुस्कुराहट के साथ हाँ में सिर हिलाया।
विक्रांत ने उसके गालों को हाथों में लिया और दोबारा उसके होंठों को अपने होंठों से दबाया। इस बार चुंबन ज़्यादा ‘पैशनेट’ था। मैंने देखा कि प्रिया का हाथ विक्रांत की पीठ पर फिर रहा था। फिर विक्रांत ने उसकी गर्दन पर ‘चुम्बन’ शुरू किए, नीचे की तरफ बढ़ते हुए। प्रिया ने अपना सिर पीछे की ओर झुका लिया, एक मदहोश सी ‘आह’ निकालते हुए।
मैं अब तक सिर्फ़ देख रहा था, लेकिन मेरे शरीर में ‘उत्तेजना’ साफ़ महसूस हो रही थी। विक्रांत ने प्रिया की कुर्ती के बटन खोलने शुरू किए। एक-एक करके बटन खुलते गए, और उसकी ‘स्तनों’ की झलक दिखने लगी। उसने कोई ब्रा नहीं पहन रखी थी। विक्रांत ने कुर्ती के किनारों को अलग किया और उसके स्तनों को अपने हाथों में ले लिया। प्रिया ने ‘सिसकी’ भरी। विक्रांत ने उसके एक निप्पल को अपने मुँह में ले लिया और ‘चूसना’ शुरू कर दिया। प्रिया के हाथ विक्रांत के बालों में उलझ गए।
फिर विक्रांत ने मेरी तरफ देखा और अपनी जगह से हट गया। अब प्रिया सीधे मेरी तरफ देख रही थी। मैंने धीरे से आगे बढ़कर उसे चूमा। ये चुंबन अलग था – नरम, एक्सप्लोर करने वाला। उसने जवाब दिया। उसके होंठ मेरे होंठों पर थे, और मेरा हाथ उसकी पीठ पर फिर रहा था। फिर मैंने भी उसकी गर्दन पर चुंबन देना शुरू किया। उसकी त्वचा में हल्की सी खुशबू थी, नहाने वाले साबुन जैसी।
विक्रांत अब हमारे पीछे खड़ा था। उसने प्रिया की कुर्ती पूरी तरह उतारकर फर्श पर फेंक दी। प्रिया अब पूरी तरह ऊपर से नंगी थी। उसके स्तन सुडौल थे, और उसके निप्पल ‘गरम’ और गहरे रंग के थे। विक्रांत ने उसके पैरों के बीच घुटने टेके। उसने प्रिया की जींस और अंदरुनी कपड़े धीरे से नीचे खींचे। प्रिया ने उसकी मदद की, अपने कूल्हों को ऊपर उठाते हुए।
अब वो पूरी तरह नंगी थी, हमारे सामने। विक्रांत ने उसकी जांघों के बीच अपना चेहरा रखा। प्रिया ने एक तेज ‘कराह’ भरी जब विक्रांत ने अपनी जीभ से उसके सबसे नाज़ुक हिस्से को छुआ। वो ‘योनी लेहन’ कर रहा था, और प्रिया का शरीर एक ‘रोमांच’ से कांप उठा। उसने अपनी उंगलियाँ मेरे बालों में भींच लीं, क्योंकि मैं अब भी उसके होंठों और गर्दन को चूम रहा था।
प्रिया की सांसें तेज हो गई थीं। उसने अपने हाथ नीचे ले जाकर विक्रांत के सिर को पकड़ लिया, उसे और दबाव के साथ अपनी ओर खींचते हुए। “हाँ… ऐसे ही,” वो फुसफुसाई। फिर उसने मेरी तरफ देखा और अपना एक हाथ मेरे कमरे की तरफ बढ़ाया। मैंने अपनी जींस उतार दी। उसने मेरे ‘लंड’ को अपने हाथ में ले लिया और धीरे-धीरे उसे सहलाना शुरू किया। उसका स्पर्श इतना नरम और सटीक था कि मैं कराह उठा।
विक्रांत ने अपना सिर उठाया। उसका चेहरा गीला था। प्रिया ने अब अपना दूसरा हाथ विक्रांत की ओर बढ़ाया और उसके पैंट खोल दिए। कुछ ही सेकंड में वो भी नंगा था। प्रिया ने अब हम दोनों के लिंगों को अपने दोनों हाथों में ले लिया और उन्हें एक साथ रगड़ना शुरू कर दिया। ये नज़ारा… दोनों को एक साथ उसके हाथों में देखना… मेरे लिए बिल्कुल नया और जबर्दस्त ‘उत्तेजक’ था। विक्रांत की आँखों में एक संतुष्टि थी, जैसे वो इस ‘काम-क्रीड़ा’ का आनंद ले रहा हो।
प्रिया ने फिर विक्रांत को देखा और अपने पैर फैलाते हुए सिरहाने की तरफ सरक गई। विक्रांत उसके ऊपर चढ़ गया। उसने प्रिया के पैरों को अपने कंधों पर रखा और धीरे से अपने लिंग को उसकी ‘योनी’ के द्वार पर टिकाया। एक सेकंड का विराम था, और फिर वो अंदर ‘घुस’ गया। प्रिया ने एक गहरी, भरी हुई ‘आह’ निकाली, और उसकी आँखें चौंधिया गईं। विक्रांत ने ‘ठोकना’ शुरू किया, शुरुआत में धीरे-धीरे, फिर तेज़।
मैं उनके बगल में बैठा ये सब देख रहा था, अपने हाथ से अपने लिंग को सहला रहा था। विक्रांत का शरीर पसीने से चमक रहा था। प्रिया ने अपनी आँखें खोलीं और मेरी तरफ देखा। उसने अपना मुँह खोला, जैसे कुछ कहना चाहती हो। विक्रांत ने ये देखा। उसने एक तेज़ धक्का दिया, जिससे प्रिया कराह उठी, और फिर विक्रांत ने अपना सिर झुकाया और उसके खुले मुँह में ‘थूक’ दिया।
प्रिया ने आँखें मूँद लीं और उस थूक को निगल लिया। फिर विक्रांत ने अपनी गति तेज़ कर दी। उसने प्रिया के कूल्हों को पकड़ा और उसे पलट दिया। अब प्रिया हाथों और घुटनों के बल थी। विक्रांत उसके पीछे खड़ा हो गया और दोबारा उसके अंदर ‘घुसा’। प्रिया ने अपना सिर पीछे की ओर झुकाया। अब वो ‘डॉगी स्टाइल’ में थी।
यहीं से मेरी बारी आई। मैं उसके सामने घुटनों के बल बैठ गया। प्रिया ने मेरी तरफ देखा, उसकी आँखों में एक ‘मदहोशी’ थी। मैंने अपने लिंग को उसके मुँह के पास ले जाया। उसने बिना किसी हिचकिचाहट के अपना मुँह खोला और उसे अपने अंदर ले लिया। ये कोई साधारण ब्लोजॉब नहीं था; वो मेरे लिंग को अपने गले तक ले जा रही थी, ‘डीप-थ्रोट’ कर रही थी। उसके गले के संकुचन का एहसास… मैंने अपना सिर पीछे झुकाया और एक ‘कर्राहट’ निकाली।
अब हम दोनों एक साथ उसे ‘चोद’ रहे थे। विक्रांत पीछे से धक्के दे रहा था, और मैं आगे से। प्रिया के शरीर से पसीना बह रहा था। वो हमारे बीच एक सेतु बन गई थी। विक्रांत ने मेरी तरफ देखा और एक शैतानी मुस्कुराहट के साथ अपना हाथ उठाया। और फिर उसने प्रिया के एक नितंब पर जोर से ‘थप्पड़’ मारा। आवाज़ तेज थी। प्रिया ने मेरे लिंग पर एक गहरी ‘सिसकी’ भरी, लेकिन उसने अपने मुँह का दबाव और बढ़ा दिया।
मैंने भी अपना हाथ उठाया और उसके दूसरे नितंब पर थप्पड़ मारा। अब ये एक ताल में बदल गया। विक्रांत जब धक्का देता, तो मैं थप्पड़ मारता। प्रिया की ‘कराहने’ की आवाज़ें तेज हो गईं। वो पूरी तरह ‘दीवानी’ हो चुकी थी, इस अनुभव के जादू में। विक्रांत की सांसें फूलने लगी थीं। “मैं… मैं निकलने वाला हूँ!” वो भौंक कर बोला।
प्रिया ने अपना हाथ पीछे बढ़ाया और विक्रांत की जांघ को पकड़ लिया, जैसे कह रही हो – मत रुको। विक्रांत ने एक आखिरी, तेज धक्का दिया और जोर से कराहा। मैंने महसूस किया कि प्रिया का शरीर ऐंठ गया। विक्रांत ने उसके अंदर ही अपना वीर्य छोड़ दिया, और वो थोड़ी देर तक उसी अवस्था में खड़ा रहा, हाँफते हुए।
फिर उसने धीरे से अपना लिंग बाहर निकाला और बिस्तर पर लेट गया। प्रिया ने मेरा लिंग अपने मुँह से बाहर निकाला। उसकी लार मेरे लिंग से बह रही थी। वो थकी हुई, पर संतुष्ट लग रही थी। लेकिन मेरा काम अभी ख़त्म नहीं हुआ था। मैं अभी भी ‘बेताब’ था।
प्रिया समझ गई। उसने मुझे पीछे की तरफ धकेला और खुद अपने पैरों के बल खड़ी हो गई। फिर उसने अपने स्तनों को मिलाया और मुझे इशारा किया। मैं समझ गया। मैं उसके सामने खड़ा हो गया। उसने मेरे लिंग को अपने स्तनों के बीच रख लिया और उन्हें दबाकर मेरे लिंग को घेर लिया। फिर उसने ऊपर-नीचे हिलना शुरू किया। ये एहसास अद्भुत था – नरम, गरम, और चिकना। मैंने उसके कंधों को पकड़ लिया और तेजी से हिलना शुरू किया। सिर्फ कुछ ही सेकंड में, मैंने भी कराहते हुए अपना वीर्य उसके स्तनों पर ‘डाल’ दिया।
सब कुछ शांत हो गया। सिर्फ हम तीनों की हाँफने की आवाजें थीं। प्रिया ने अपने स्तनों पर गिरे वीर्य को एक उंगली से छुआ और देखा, फिर अपनी उंगली मुँह में डाल ली। उसने मुस्कुराते हुए मेरी तरफ देखा।
हम लगभग पंद्रह मिनट तक चुपचाप पड़े रहे, सांसें सामान्य होने का इंतज़ार करते हुए। विक्रांत सो गया लग रहा था। मैंने अपना हाथ बढ़ाया और प्रिया के बालों में हल्का सा हाथ फेरा। उसने आँखें खोलीं और मेरी तरफ देखा।
“पहली बार?” उसने धीरे से पूछा।
मैंने हाँ में सिर हिलाया।
“अच्छा लगा?” उसकी आवाज़ में एक शरारत थी, लेकिन एक सच्ची दिलचस्पी भी।
“बहुत,” मैंने कहा, और ये सच था। शारीरिक संतुष्टि से परे, एक अजीब सी भावनात्मक ‘मदहोशी’ थी।
उसने मुस्कुराया और बिस्तर से उठी। उसने फर्श पर बिखरे हुए अपने कपड़े उठाए और बाथरूम की तरफ चली गई। कुछ देर बाद वो तैयार होकर बाहर आई। विक्रांत अब जाग चुका था। उसने प्रिया को पैसे दिए, जो उसने पर्स में रख लिए। कोई ज्यादा बातचीत नहीं हुई।
दरवाजे पर जाते हुए, प्रिया ने मुड़कर मेरी तरफ देखा। “अगर कभी फिर से पटना आओ… तो फोन करना।” और वो चली गई।
विक्रांत ने दरवाजा बंद किया और मेरी तरफ देखकर मुस्कुराया। “कैसा रहा मजा, साले?”
मैंने जवाब नहीं दिया। बस बिस्तर पर लेट गया और छत की तरफ देखने लगा। मेरे दिमाग में प्रिया का चेहरा, उसकी आवाज़, और उस रात के ‘रोमांच’ घूम रहे थे। ये सिर्फ सेक्स नहीं था। ये कुछ और था। कुछ ऐसा जो मैं कभी भूल नहीं पाऊँगा। पटना की उन अनजान गलियों का दीवाना बन गया था मैं।
