मेरा नाम गौरव चौधरी है और मैं फरीदाबाद, हरियाणा में रहता हूँ। मैं एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर हूँ और मेरी जिंदगी ज्यादातर कोडिंग, मीटिंग्स और फरीदाबाद की भीड़-भाड़ वाली सड़कों के इर्द-गिर्द घूमती थी। एक लंबे और थकाऊ प्रोजेक्ट के बाद, मेरे दोस्तों के ग्रुप ने गोवा जाने का प्लान बनाया। मैंने भी हाँ कर दी, बस एक ब्रेक के लिए। मुझे नहीं पता था कि यह ट्रिप मेरी जिंदगी बदल देगी।
हम लोग एक बीच रिसॉर्ट में ठहरे थे। पहला दिन, सब लोग बीच पर धूप सेंकने और फोटो खींचने में बीत गया। शाम को, हम सब बीच के किनारे पर बने एक छोटे से शैक पर बैठे थे, नारियल पानी पी रहे थे। तभी मेरी नज़र उस पर पड़ी। वह अकेली बैठी थी, एक नीली सुनहरी पट्टी वाली सफ़ेद ड्रेस में, और अपने फोन में कुछ देख रही थी। उसके लंबे, काले बाल हवा में उड़ रहे थे। उसका चेहरा… शब्दों में बयां करना मुश्किल है। कोमल, साफ त्वचा, बड़ी-बड़ी आँखें, और होंठों पर एक हल्की सी मुस्कान। वह इतनी सुन्दर लग रही थी कि मैं कुछ पल के लिए उसे देखता ही रह गया।
मेरे दोस्त निखिल ने मेरा ध्यान भटकता देखा तो मुझे झटका दिया। “अरे, गौरव! देखते रह गए? जाओ, बात करो।” मैंने हिचकिचाया, लेकिन फिर एक गहरी साँस लेकर उठा। मैं उसके पास गया और बोला, “एक्सक्यूज़ मी… यहाँ कोई और बैठा है क्या?” उसने ऊपर देखा, उसकी आँखों में एक चमक थी। “नहीं, बिल्कुल फ्री है,” उसने मुस्कुराते हुए कहा। उसकी आवाज़ में एक मिठास थी। मैं बैठ गया। पहले कुछ मिनट तो बस औपचारिक बातें ही चलीं – नाम, कहाँ से हैं, क्या करते हैं। उसका नाम स्नेहा फोगत था और वह दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ती थी, मनोविज्ञान की छात्रा थी। उसका तरीका इतना आरामदायक और बातूनी था कि मेरी नर्वसनेस गायब हो गई। हमने म्यूजिक, ट्रैवल, और फिल्मों के बारे में बात की। पता ही नहीं चला कब एक घंटा बीत गया।
अगले दिन, हमारा ग्रुप साईट-सीइंग के लिए निकला, लेकिन मैंने बहाना बना दिया कि मुझे थोड़ा आराम करना है। असल में, मुझे उम्मीद थी कि शायद स्नेहा से फिर मुलाकात हो जाए। और हुई भी। दोपहर में वह बीच पर ही मिली, एक बड़ी सी स्ट्रॉ हैट पहने, किताब पढ़ रही थी। मैंने पास जाकर हैलो कहा। उस दिन हमने लंबी वॉक की, पैरों तक आती लहरों के साथ चलते हुए। कभी किसी बात पर हँसते, कभी चुप हो जाते, बस समुद्र की आवाज़ सुनते। मुझे उसकी हंसी बहुत पसंद आई – खुलकर, बेफिक्र। कभी वह कोई बात कहती और बात खत्म होने से पहले ही मुझसे आँखें मिला लेती, मानो पूछ रही हो “तुम क्या सोच रहे हो?” मेरा दिल एक अजीब सी धड़कन से भर उठता।
एक मोड़ पर, एक तेज़ लहर आई और उसने हमारे पैरों को भिगो दिया। स्नेहा चौंककर पीछे हटी और संतुलन बनाने के लिए उसने अनजाने में मेरा हाथ पकड़ लिया। उसका स्पर्श… गर्म और नर्म। हम दोनों एक पल के लिए ठहर गए। फिर उसने हँसते हुए हाथ छोड़ दिया, “ओह सॉरी! लहरों का कुछ भरोसा नहीं।” लेकिन उस पल की गर्मी मेरे हाथ पर कहीं बसी रह गई। बाद में, जब हम वापस लौट रहे थे, तो हवा के एक झोंके से उसके बाल मेरे चेहरे से टकरा गए। एक हल्की सी खुशबू… नारियल और कुछ फूलों जैसी। मैंने बस मुस्कुरा दिया। वह भी मुस्कुराई, शायद शरमाते हुए। उस दिन शाम को हम फिर उसी शैक पर मिले। बातें लंबी चलीं। उसने बताया कि वह अपनी दोस्तों के साथ आई थी, लेकिन वे किसी और प्लान में बिजी हो गईं। मैंने महसूस किया कि हम दोनों ही इस अनपेक्षित साथ का आनंद ले रहे हैं।
तीसरे दिन, मेरे दोस्तों को पता चल गया कि मैं किसी के साथ समय बिता रहा हूँ। वे मुझे टीज करने लगे। “अबे गौरव, तू तो सेट है! कब से कन्फर्म कर रहा है?” मैं उन्हें टाल देता। असल में, मैं खुद समझ नहीं पा रहा था। स्नेहा के साथ होना अच्छा लगता था। एक शाम हम बीच के किनारे पर बैठे थे, सूरज डूब रहा था। आसमान नारंगी और बैंगनी रंगों से भर गया था। वह चुपचाप बैठी थी, अपने घुटनों को गले लगाए। मैंने पूछा, “क्या सोच रही हो?” उसने मुझे देखा, उसकी आँखों में सूरज की चमक समाई हुई थी। “बस… यह पल कभी खत्म न हो,” उसने कहा। मैं कुछ नहीं बोला। बस उसकी तरफ देखता रहा। उस समय मैंने जाना कि मैं उसकी ओर आकर्षित हूँ। सिर्फ उसके रूप से नहीं, बल्कि उसकी मासूमियत, उसकी हँसी, उसके साथ बिताए हर पल से।
रात का वह दृश्य अभी भी मेरी आँखों के सामने है, जैसे कल की ही बात हो। दिन भर की गर्मी के बाद, रात ठंडी और सुहावनी थी। चांदनी समुद्र की सतह पर चमक रही थी, जैसे हीरे बिखरे हों। हम दोनों, स्नेहा और मैं, बीच पर टहल रहे थे। हमारे दोस्त पार्टी में बिजी हो गए थे, लेकिन हमें शांति पसंद थी। स्नेहा ने अपने पैरों को लहरों में डाला हुआ था। “पानी इतना गर्म लग रहा है,” उसने कहा, मुस्कुराते हुए। मैंने भी ऐसा ही किया। सचमुच, पानी दिनभर की धूप से गरमाहट समेटे हुए था।
“चलो तैरते हैं,” उसने अचानक कहा, उसकी आँखों में एक शरारती चमक।
“अभी? रात को?” मैंने हँसते हुए पूछा।
“हाँ! कौन देख रहा है? बस चांद और तारे,” उसने कहा, और बिना किसी हिचकिचाहट के अपनी ड्रेस उतारकर रेत पर फेंक दी। उसने एक साधारण सा बिकनी पहन रखा था। चांदनी में उसका शरीर… एक सपना लग रहा था। कोमल रेखाएँ, नर्म मोड़। मैं देखता ही रह गया। उसने मेरी तरफ देखा, शायद मेरी हैरानी भरी नज़रों को नोटिस करते हुए। “तुम भी आओ न,” उसने कहा, और समुद्र की ओर भागी। मैंने भी जल्दी से अपनी शर्ट उतारी और उसके पीछे भागा।
पानी हमारे शरीरों को छूते ही एक रोमांच सा दौड़ गया। वह गर्म था, लेकिन हवा ठंडी थी। स्नेहा तैर रही थी, उसके बाल पानी में तैरते हुए। मैंने उसका पीछा किया। कुछ ही देर में हम गहरे पानी में थे, जहाँ पैर जमीन को नहीं छू रहे थे। वह मेरे पास आई, हँस रही थी। “मज़ा आ रहा है न?” उसकी सांसें थोड़ी तेज़ थीं। मैंने सिर हिलाया। हम आँखें मिलाए खड़े थे, पानी हमारे कंधों तक आ रहा था। चारों तरफ सिर्फ लहरों की आवाज़ और चांदनी थी। फिर, शायद ठंड के मारे, या फिर किसी और वजह से, वह मेरे थोड़ा और पास आ गई। हमारे शरीर छू गए। उसका गीला शरीर मेरे से सटा हुआ था। मैंने उसकी कमर पर हाथ रखा, उसे संभालने के लिए। उसने अपनी बाहें मेरे गले के आसपास डाल लीं। और फिर… धीरे से, हमने चुंबन लेना शुरू किया। पहले कोमल, फिर उत्सुकता से भरा हुआ। उसके होंठ नर्म थे, थोड़े नमकीन। लहरें हमारे आसपास उठती-गिर रही थीं, मानो हमारी इस अंतरंगता का संगीत बना रही हों। मेरे हाथ उसकी पीठ पर फिर रहे थे, उसकी नर्म त्वचा को महसूस करते हुए। हमारी सांसें एक दूसरे में मिल रही थीं। उस पल में दुनिया बस हम दोनों थे।
कुछ देर बाद, मैंने उसे अपनी बाहों में उठा लिया। वह हल्की थी। मैं उसे लेकर किनारे की ओर तैरा, वह मेरे गले से चिपकी हुई थी, मेरे कान के पास हल्की सी आह भरते हुए। हम उस जगह पहुँचे जहाँ हमने अपने तौलिये फैलाए थे। मैंने उसे धीरे से रेत पर लिटा दिया। चांदनी सीधे उसके चेहरे पर पड़ रही थी। वह सुंदर लग रही थी। उसकी आँखें मुझे देख रही थीं, एक सवाल, एक इंतज़ार। मैंने उसके ऊपर झुककर फिर से उसके होंठों को चूमा। फिर मेरे चुंबन ने उसके गाल, उसकी गर्दन का रास्ता लिया। वह धीरे-धीरे आहें भर रही थी। मेरे होंठ उसके कंधे तक पहुँचे, जहाँ समुद्र का पानी अभी भी बूंदों के रूप में जमा था। मैंने उन नमकीन बूंदों को चाटा। उसकी त्वचा का स्वाद… नमक और कुछ मीठापन। मेरे होठ उसकी छाती की ओर बढ़े। उसके बिकनी के ऊपरी हिस्से को हटाते हुए, मैंने उसके स्तनों को देखा। चांदनी में वे और भी आकर्षक लग रहे थे। मैंने धीरे से एक को चूमा, फिर दूसरे को। उसने एक लंबी सांस ली। मैंने अपनी जीभ से उसके निप्पल का घेरा चखा, फिर उसे अपने मुँह में लेकर कोमलता से चूसा। वह कराह उठी, उसकी उंगलियाँ मेरे बालों में चली गईं, मुझे और दबाकर अपनी ओर खींचते हुए।
फिर मेरे चुंबन ने उसके पेट की ओर रुख किया, उसकी नर्म त्वचा पर एक के बाद एक चुंबन बिखेरते हुए। वह सिहर रही थी, शायद ठंड से, या फिर उत्तेजना से। मैंने उसके बिकनी के निचले हिस्से को भी हटा दिया। और फिर मैं उसकी जांघों के बीच था। चांदनी इतनी रोशनी दे रही थी कि सब कुछ साफ दिख रहा था। मैंने उसकी जांघों को धीरे से चूमा, उसे खोलते हुए। उसने अपनी जांघें थोड़ी और फैला दीं, एक साइलेंट इनविटेशन। और फिर मैंने अपनी जीभ से उसकी योनी को छुआ। नमकीन, समुद्र जैसी खुशबू। उसने तेज आह भरी। मैंने उसके भगशिश्न पर ध्यान केंद्रित किया, उसे अपनी जीभ से कोमलता से सहलाया, फिर हल्का सा चूसा। वह तड़प उठी, उसकी हाफने की आवाज़ रेत की सरसराहट में मिल रही थी। उसकी उंगलियाँ मेरे सिर को दबोचे हुए थीं, मुझे गाइड कर रही थीं। मैं उसकी प्रतिक्रिया से उत्तेजित हो रहा था। उसका शरीर लहरों की तरह उठना-गिरना शुरू हो गया था।
कुछ मिनट बाद, उसने मुझे धीरे से ऊपर खींचा। उसकी आँखें चमक रही थीं। “मेरी बारी,” उसने फुसफुसाया। उसने मुझे नीचे लिटाया, मेरे ऊपर बैठ गई। उसने मेरे शॉर्ट्स को नीचे खिसकाया। हवा का एक झोंका मेरे उत्तेजित लिंग को छू गया। उसने उसे अपने हाथ में लिया, एक पल के लिए महसूस किया। फिर वह नीचे झुकी और उसे अपने मुँह में ले लिया। गर्मी… अद्भुत गर्मी ने मुझे घेर लिया। उसने अपना सिर आगे-पीछे हिलाया, एक लयबद्ध तरीके से। लहरों की आवाज़ और उसके मुख-मैथुन की ध्वनि मिलकर एक अजीब सी सुखद संगीत बना रही थी। मैं कराह उठा, मेरा सिर पीछे की ओर झुक गया। उसकी जीभ ने मेरे लिंग के सिरे को नचाया। मैंने अपनी उंगलियों से उसके बालों को सहलाया। मैं उसके मुँह के अंदर और गहराई तक जाना चाहता था, लेकिन मैंने खुद को रोका। यह बहुत जल्दी हो रहा था।
थोड़ी देर बाद, उसने रुक कर मुझे देखा। उसके होंठ चमक रहे थे। बिना कुछ कहे, वह मेरे ऊपर सवार हो गई, मेरे लिंग को अपनी योनी के प्रवेश द्वार पर रखते हुए। एक लंबी सांस लेकर, वह धीरे से नीचे उतरी। तंग, गर्म आनंद ने मुझे घेर लिया। वह ऊपर-नीचे होने लगी, एक घोड़े की सवारी की तरह। रेत हमारे गीले शरीरों से चिपक रही थी, एक कर्कश संवेदना पैदा कर रही थी। उसके स्तन लहरा रहे थे। मैंने बैठने की कोशिश की, और वह मेरी गोद में बैठ गई। मैंने उसे गले लगा लिया, और हम एक साथ हिलने लगे, एक गहरी, धीमी लय में। उसका सिर मेरे कंधे पर टिका हुआ था, वह हाफ रही थी। फिर उसने अपना सिर पीछे की ओर झुका दिया, उसकी गर्दन चांदनी में नहा रही थी। उसका शरीर कठोर हो गया, एक लंबी, कंपकंपाती हुई कराह के साथ वह चरमोत्कर्ष पर पहुँच गई। समुद्र की हवा उसकी त्वचा से टकरा रही थी, उसके बाल उड़ रहे थे।
उसके शरीर की कंपकंपी शांत हुई तो मैंने उसे धीरे से रेत पर वापस लिटा दिया। मैं उसके बीच में था, उसकी जांघों के बीच। उसकी आँखें मुझे देख रही थीं, पूरी तरह से विश्वास से भरी हुई। मैंने अपने लिंग को उसकी योनी के प्रवेश द्वार पर फिर से रखा, और फिर धीरे से अंदर प्रवेश किया। इस बार सब कुछ और गहरा, और अधिक उत्सुक लग रहा था। मैंने धीमी, गहरी थ्रस्ट्स शुरू कीं। वह मेरी ओर देखती रही, कभी-कभी आँखें मूंदते हुए। मैंने अपनी गति बढ़ाई। उसकी कराहें लहरों की आवाज़ में खो गईं। मैं उसके अंदर गहराई तक जा रहा था, उसकी गर्मी में खोता जा रहा था। मेरे शरीर में तनाव बढ़ रहा था, एक ज्वार की तरह। और फिर, एक तेज़, अंतिम धक्के के साथ, मैं उसमें विसर्जित हो गया। एक लंबी, गर्म लहर ने मुझे ढक लिया। मैं गिर गया, उसके ऊपर, मेरी सांसें भारी थीं। उसने अपनी बाहें मेरे चारों ओर लपेट लीं।
हम ऐसे ही पड़े रहे, कब तक पता नहीं। हमारे शरीर एक दूसरे से चिपके हुए थे, रेत और पसीने से सने हुए। धीरे-धीरे हमारी सांसें सामान्य हुईं। समुद्र की लहरें अब भी वही गीत गा रही थीं। मैंने खुद को उसके ऊपर से हटाया और उसके बगल में लेट गया। वह मेरी ओर मुड़ी, उसकी आँखें अभी भी चमक रही थीं। उसने मेरा हाथ पकड़ लिया। कुछ बोले बिना, हम दोनों आसमान की ओर देखने लगे। तारे टिमटिमा रहे थे। मेरे मन में एक अजीब सी शांति थी, एक संतुष्टि। फिर उसने फुसफुसाया, “वाह… यह…” वह अपने शब्द पूरे नहीं कर पाई। मैंने उसके हाथ को हल्का सा दबाया। “हाँ,” मैंने बस इतना कहा। हम कुछ देर और वहीं पड़े रहे, ठंडी हवा के झोंके हमारे गर्म शरीरों को छूते रहे। आखिरकार, हम उठे। बिना कपड़ों के ही हमने समुद्र में एक बार फिर डुबकी लगाई, एक दूसरे से चिपके हुए, सब कुछ धोने के लिए। पानी अब ठंडा लग रहा था। फिर हमने अपने कपड़े पहने, चुपचाप, मानो किसी पवित्र अनुष्ठान को निभा रहे हों।
हम रिसॉर्ट की ओर चल पड़े। रास्ते भर कोई बात नहीं हुई। लेकिन हमारे हाथ एक दूसरे से लिपटे हुए थे। जब हम उसके रूम के दरवाजे तक पहुँचे, तो वह रुक गई। उसने मेरी ओर देखा, एक प्रश्न उसकी आँखों में तैर रहा था। मैंने मुस्कुराते हुए उसके माथे को चूमा। “कल मिलते हैं,” मैंने कहा। उसने सिर हिलाया। “जरूर,” उसने फुसफुसाया। और फिर वह अंदर चली गई। मैं अपने कमरे की ओर चला। रात का वह सारा दृश्य मेरे दिमाग में चल रहा था – चांदनी, लहरें, उसकी कराहें, उसकी आँखों में चमक। यह कोई सपना नहीं था। रेत अभी भी मेरे जूतों में फंसी हुई थी, और मेरी त्वचा पर नमक की एक परत थी। मैं बिस्तर पर गिर गया, थका हुआ, लेकिन एक अजीब सी ऊर्जा से भरा हुआ। आखिरी बात जो मैंने सोचा, वह यह थी कि कल फिर से उसे देखूंगा। और शायद, कल फिर से कुछ ऐसा ही होगा।
