मेरा नाम आयुष श्रीवास्तव है और मैं लखनऊ में रहता हूँ। यह कहानी उस शाम से शुरू होती है, जब मैं अपने दफ्तर से निकलकर गोमती नगर के उस छोटे-से, शांत कॉफी शॉप में घुसा। एसी की ठंडी हवा ने मेरे चेहरे पर जमी दिनभर की थकान और गर्मी को थोड़ा सा धोया। मैंने अपनी सामान्य वाली टेबल की तरफ देखा – वह खाली थी। लेकिन आज वहाँ कोई और बैठा था। एक लड़की। वह लैपटॉप पर कुछ टाइप कर रही थी, उसके चेहरे पर एकाग्रता की एक हल्की सी लकीर थी। उसने चश्मा पहना हुआ था, और उसके लंबे, काले बाल एक साइड में बह रहे थे। उसने एक सादी सी सफेद कुर्ती और नीली जींस पहन रखी थी। कुछ पलों के लिए मैं वहीं खड़ा रहा, उसे देखता रहा। फिर उसने सिर उठाया और मेरी नज़रों से सीधा टकरा गई।
उसकी आँखें बड़ी और गहरी थीं, शहद जैसा रंग लिए हुए। एक पल के लिए वह भी मुझे देखती रही, फिर एक हल्की सी मुस्कान उसके होठों पर आई। मैंने हिम्मत करके पास जाकर पूछा, “क्या यह सीट खाली है?” उसने सिर हिलाया, “हाँ, ज़रूर।” उसकी आवाज़ में एक मुलायम, संगीतमय स्वर था। मैं बैठ गया। वह फिर से अपने लैपटॉप में खो गई, लेकिन मैं उसे देखता रहा। उसके होंठों का वक्र, उसकी गर्दन की नाज़ुक रेखा, और जब वह कॉफी का कप उठाती, तो उसकी उंगलियों का पतलापन – सब कुछ मेरा ध्यान खींच रहा था। कुछ देर बाद उसने फिर से मेरी तरफ देखा, शायद मेरी नज़रों का एहसास हो गया था। उसकी मुस्कान थोड़ी और चौड़ी हुई। “आप अक्सर यहाँ आते हैं?” उसने पूछा।
“हाँ,” मैंने कहा, “दफ्तर के बाद यहाँ आकर थोड़ा सुकून मिल जाता है। आप?”
“मैं सना हूँ,” उसने कहा, “मैं फ्रीलांस ग्राफिक डिज़ाइनर हूँ। कभी-कभी यहाँ आकर काम कर लेती हूँ। घर पर बोर हो जाती हूँ।”
उस दिन की बातचीत ज़्यादा लंबी नहीं हुई, लेकिन जाते-जाते हमने एक-दूसरे का नंबर शेयर कर लिया। उसके बाद से धीरे-धीरे बातचीत बढ़ने लगी। व्हाट्सऐप पर मैसेजेस, फिर कॉल्स। हम दोनों ही लखनऊ में अकेले रहते थे। मेरा दफ्तर हज़रतगंज में था, उसका घर अलीगंज में। हमारी बातचीत में एक आसानी थी, एक कनेक्शन। वह बहुत हंसमुख थी, लेकिन उसमें एक गहराई भी थी। उसकी हंसी संगीत की तरह गूंजती थी। कभी-कभी रात को देर तक बात करते-करते मैं उसकी आवाज़ में एक मीठी सी थकान महसूस करता, और वह मेरे दिल को छू जाती।
एक शनिवार को हमने पहली बार आधिकारिक डेट पर जाने का प्लान बनाया। मैंने उसे ‘दिलखुश’ रेस्तराँ में डिनर के लिए आमंत्रित किया। जब मैंने उसे वहाँ देखा, तो मेरी सांस थोड़ी देर के लिए रुक सी गई। उसने एक गहरे लाल रंग का अनारकली सूट पहना हुआ था, जो उकेरे हुए काम से सजा था। उसके बाल खुले हुए थे, और उसने हल्का सा मेकअप किया हुआ था। उसकी आँखों में एक चमक थी। “तुम तो बिल्कुल राजकुमारी लग रही हो,” मैंने कहा। उसने शरमाते हुए मुस्कुरा दिया, “ओह, बस फॉर्मल वाला पहन लिया।” पूरी रात हमने खाने का आनंद लिया, बातें कीं, और एक-दूसरे को जाना। उसने अपने परिवार के बारे में बताया, कैसे वह अपने सपनों को पूरा करने लखनऊ आई थी। मैंने भी अपनी कहानी सुनाई। खाने के बाद जब मैं उसे छोड़ने उसके घर पहुँचा, तो गाड़ी में बैठे-बैठे ही काफी देर तक बातें होती रहीं। बातों का सिलसिला टूटता नहीं दिख रहा था। अचानक एक पल ऐसा आया जब हम दोनों चुप हो गए। कार की लाइटें बंद थीं, केवल स्ट्रीट लैंप का हल्का प्रकाश अंदर आ रहा था। मैंने उसकी तरफ देखा, और वह मेरी तरफ देख रही थी। उसकी नज़रें मेरे होठों पर टिकी हुई थीं। मेरा दिल तेज़ी से धड़कने लगा। मैंने धीरे से अपना हाथ बढ़ाया और उसके गाल को छुआ। उसकी त्वचा बहुत मुलायम थी। उसने अपनी आँखें बंद कर लीं, और एक हल्की सी सिहरन उसके शरीर से गुज़री। मैंने झुककर उसके होठों को चूमा। वह चुंबन कोमल और छोटा था, लेकिन उसमें एक तीव्र इच्छा छिपी हुई थी। जब हम अलग हुए, तो उसकी सांसें तेज़ थीं। उसने मुस्कुराते हुए कहा, “तुम्हें अंदर आना चाहिए?”
उसका फ्लैट छोटा, लेकिन आरामदायक और साफ-सुथरा था। दीवारों पर उसके ही बनाए कुछ डिज़ाइन्स लगे हुए थे। वह किचन में गई और दो गिलास पानी लेकर आई। हम सोफे पर बैठ गए। बातचीत फिर से शुरू हुई, लेकिन अब उसमें एक नया तनाव था, एक बेचैनी। हमारे बीच की दूरी कम होती जा रही थी। कभी मेरा हाथ उसके हाथ से छू जाता, कभी हमारे पैर एक-दूसरे को टच करते। हर एक स्पर्श में बिजली दौड़ जाती। मैंने देखा कि वह भी उतनी ही बेचैन थी। उसकी आँखों में एक ललक थी, एक तड़प। अचानक उसने मेरा हाथ पकड़ लिया और अपने गाल से सहलाया। “तुम्हारा स्पर्श… बहुत अच्छा लगता है,” उसने फुसफुसाया। मैंने उसकी ठुड्डी को पकड़कर उसका चेहरा मेरी तरफ किया और फिर से चूमा। यह चुंबन पहले से ज़्यादा गहरा, ज़्यादा वासनापूर्ण था। हमारी जीभें मिलीं, और एक गर्मी हमारे शरीर में फैल गई। मैंने उसे सोफे पर ही लेटा दिया, और मैं उसके ऊपर आ गया। हमारे शरीर एक-दूसरे से चिपक गए थे। मैंने उसके गाल, उसकी गर्दन, उसके कानों पर चुंबनों की बौछार कर दी। वह मेरे बालों में अपनी उंगलियाँ फंसाए हुए थी, और मदहोश सी आहें भर रही थी। “आयुष…” उसने मेरे नाम को एक सिसकी की तरह बोला।
मैंने अपना सिर उठाया और उसकी आँखों में देखा। उनमें एक साफ मांग थी। मैंने उसके कुर्ते के बटन खोलने शुरू किए। एक-एक करके। उसकी सांसें तेज़ होती जा रही थीं। जब आखिरी बटन खुला, तो मैंने उसके अंदर एक काले रंग का लेस वाला ब्रा देखा। उसके स्तन उसमें भरकर बाहर आ रहे थे। मैंने उसके कंधों से कुर्ती को नीचे खिसकाया। उसकी त्वचा चाँदनी की तरह चमक रही थी। मैंने अपना हाथ उसकी पीठ पर फिराया और ब्रा का हुक खोल दिया। वह धीरे से उसके शरीर से नीचे सरक गया। उसके स्तन सुडौल और भरे हुए थे, और उनके ऊपर के निप्पल गहरे गुलाबी रंग के थे, और अब पहले से कड़े हो रहे थे। मैंने अपना मुँह उनकी तरफ बढ़ाया और एक को चूसना शुरू किया। सना ने एक तीखी सी आह भरी, और उसने मेरे सिर को और जोर से अपनी तरफ दबा लिया। मैं दूसरे स्तन पर गया, उसे अपनी जीभ से सहलाया, निबलाया। वह अपनी कमर को ऊपर-नीचे कर रही थी, एक अदृश्य ताल में। मेरा हाथ उसकी जींस के बटन पर पहुँचा। मैंने उसे खोला और ज़िप नीचे की। उसने मेरी मदद की, और हमने मिलकर उसकी जींस और अंदर के पैंटी को उतार दिया। अब वह पूरी तरह नंगी थी, सोफे पर लेटी हुई, केवल मेरी नज़रों के सामने। उसकी योनी पर काले घने बाल थे, और वह गीली हो रही थी। मैंने अपनी उंगली वहाँ फेरी, और वह सिहर उठी। “तुम… तुम बहुत सुंदर हो,” मैंने कहा, मेरी आवाज़ में कामुकता का एक गहरा स्वर था।
फिर मैं खड़ा हुआ, और उसे देखता रहा। “अब तुम उठो,” मैंने कहा, मेरी आवाज़ में एक कोमल आदेश था। वह धीरे-धीरे उठी और मेरे सामने खड़ी हो गई। “अब धीरे-धीरे अपने कपड़े उतारो, जबकि मैं देखता हूँ,” मैंने कहा। उसने मेरी आँखों में देखा, और फिर अपने हाथों को अपने शरीर पर फिराना शुरू किया। उसने अपने स्तनों को सहलाया, अपने निप्पलों को मरोड़ा। उसकी आँखें बंद थीं, और उसके होठों से मदहोश सी आहें निकल रही थीं। फिर उसका एक हाथ नीचे गया, और उसने अपनी योनी को छुआ, अपनी उंगलियों को उसकी गीली सतह पर फिराया। मैं तनाव से देखता रहा, मेरा लिंग अपनी पैंट में तनकर कड़ा हो रहा था। जब वह अपने आप को छू रही थी, मैं उसके पास गया। मैंने अपना हाथ उठाया और उसकी योनी के ऊपर, उसके मांसल हिस्से पर, एक तेज़ थप्पड़ जड़ दिया। थप! सना चीख उठी, “आह!” उसकी आँखें खुल गईं, हैरानी और उत्तेजना से भरी हुई। जहाँ मैंने थप्पड़ मारा था, वहाँ का रंग गहरा लाल हो गया था, और मैंने देखा कि उसकी योनी से और भी अधिक नमी बह रही थी।
मैंने अपनी दो उंगलियाँ उसके मुँह के पास लाईं। उसने बिना किसी हिचकिचाहट के उन्हें अपने मुँह में ले लिया और चाटना शुरू कर दिया, अपनी जीभ से हर कोना साफ किया। फिर मैंने वही गीली उंगलियाँ नीचे ले जाकर सीधे उसकी योनी में घुसा दीं। वह गर्म और तंग थी। सना ने एक लंबी कराह निकाली और मेरे कंधों को मजबूती से पकड़ लिया। मैंने अपनी उंगलियाँ अंदर-बाहर करना शुरू किया, कभी गहरे जाते हुए, कभी उन्हें मरोड़ते हुए, उसके अंदर के नाजुक हिस्सों को दबाते हुए। वह हर थरथराहट के साथ कांप रही थी, उसकी सांसें फूल रही थीं। “ओह भगवान… आयुष… यह…” वह पूरा वाक्य नहीं कह पाई।
मैंने उसे सोफे पर वापस लिटा दिया, इस बार पीठ के बल। फिर मैंने उसके पैरों को उठाकर अपने कंधों पर डाल लिया। इससे उसकी योनी पूरी तरह से खुल गई और मेरे सामने आ गई। मैंने अपनी पैंट उतारी, और अपने तने हुए लिंग को उसके प्रवेश द्वार पर रखा। मैंने उसकी आँखों में देखा, एक सवाल पूछते हुए। उसने तेज़ी से सिर हिलाया। मैंने धीरे से, लेकिन दृढ़ता से, अंदर प्रवेश किया। वह एक गहरा, कोणीय प्रवेश था, जो सीधे उसके सबसे संवेदनशील हिस्से को छू रहा था। उसने एक ऊँची चीख निकाली, और उसकी उंगलियाँ मेरी पीठ में घुस गईं। मैंने एक लयबद्ध गति से चलाना शुरू किया, हर धक्के के साथ और गहरे जाते हुए। फिर मैं नीचे झुका, हमारे चेहरे एक-दूसरे के इंच भर दूर। मैंने अपने मुँह में थोड़ी सी लार जमा की और उसे सीधे उसके खुले मुँह में थूक दिया। उसने कोई विरोध नहीं किया, बल्कि उसे निगल लिया, उसकी आँखों में एक वासनापूर्ण आत्मसमर्पण था। “मुझे और चाहिए,” उसने हांफते हुए कहा।
मैंने अचानक रुककर अपने आप को बाहर खींच लिया। सना ने हैरानी से मेरी तरफ देखा, उसकी आँखों में एक तीव्र खालीपन। “नहीं… मत रुको,” उसने गिड़गिड़ाते हुए कहा। “क्या चाहिए?” मैंने पूछा, मेरी आवाज़ में एक चुनौती थी। “तुम… तुम्हारा लंड… कृपया वापस अंदर आओ,” उसने बिना किसी शर्म के कहा। मैंने उसे पलट दिया, उसके घुटनों के बल खड़ा किया। फिर मैं उसके पीछे आया, एक हाथ से उसके बालों को पकड़कर पीछे की ओर खींचा, ताकि उसकी गर्दन का वक्र सामने आ जाए। दूसरे हाथ से मैंने अपने लिंग को फिर से उसकी गीली योनी में घुसा दिया, इस बार कुत्ते की मुद्रा में। यह और भी गहरा प्रवेश था। मैंने एक तेज़ गति से चलाना शुरू किया, हर धक्के के साथ उसकी गांड पर एक जोरदार थप्पड़ लगाते हुए। थप! थप! थप! हर थप्पड़ के साथ वह चिल्लाती, और उसकी योनी मेरे लिंग को और जोर से भींचती। उसकी आवाज़ें, उसकी कराहें, उसकी सिसकियाँ – सब कुछ मुझे और उत्तेजित कर रहा था। मैंने अपनी गति और तेज़ कर दी, उसके बालों को मजबूती से पकड़े हुए। फिर, जब मुझे लगा कि मैं सीमा पर हूँ, मैंने अचानक फिर से बाहर खींच लिया। “नहीं! नहीं, आयुष, कृपया!” वह रोने लगी, उसका शरीर भूख से कांप रहा था। “तुम मुझे पूरा करो… मैं तुम्हारी हूँ।”
उसके इन शब्दों ने मेरे अंदर का आखिरी रोक टूट गया। मैंने जोर से धक्का दिया और फिर से अंदर प्रवेश किया। इस बार मैंने कोई रोक नहीं रखी। मेरी गति अबाधित, तीव्र और गहरी थी। सना चिल्ला रही थी, उसका शरीर मेरे थ्रस्ट्स के साथ आगे-पीछे हिल रहा था। मैंने महसूस किया कि उसकी योनी फिर से सिकुड़ रही है, उसका दूसरा स्खलन नज़दीक था। और फिर वह हुआ। वह एक लंबी, कंपकंपाती हुई चीख के साथ चरम पर पहुँची, उसकी आंतरिक मांसपेशियाँ मेरे लिंग को जकड़ लीं। यह सनसनी असहनीय रूप से अच्छी थी। मैंने और जोर से धक्का दिया, गहरे तक जाते हुए, और अपना वीर्य उसके अंदर गर्म धाराओं में छोड़ दिया, एक गर्जनापूर्ण चीख के साथ जो मेरे फेफड़ों से निकलकर कमरे में गूंज गई। हम दोनों ही कांपते हुए, हांफते हुए, एक-दूसरे पर गिर पड़े।
कुछ मिनटों तक हम वैसे ही पड़े रहे, केवल हमारी सांसों की आवाज़ और दिल की धड़कनें सुनाई दे रही थीं। फिर मैं धीरे से उससे अलग हुआ और उसके बगल में लेट गया। सना ने अपनी आँखें खोलीं। उनमें एक शांत संतुष्टि थी, एक गहरी थकान के साथ। वह मेरी तरफ मुड़ी और अपना सिर मेरी छाती पर रख लिया। मैंने उसके पसीने से तर बालों को सहलाया। कोई शब्द नहीं थे। उस पल में जो हुआ था, उसके लिए शब्द कम पड़ जाते। कमरे में हवा भारी थी, हमारे शरीरों की गर्मी और यौन क्रिया की गंध से। धीरे-धीरे हमारी सांसें सामान्य होने लगीं। सना ने एक लंबी सांस ली और बोली, “वाह… यह… यह कुछ और ही था।” उसकी आवाज़ भारी और खुरदरी थी।
“हाँ,” मैंने केवल इतना कहा, और उसे अपने पास और करीब खींच लिया। हम वहाँ लेटे रहे, समय के बीतने का इंतज़ार किए बिना। बाहर लखनऊ की रात शांत थी, लेकिन इस कमरे के अंदर एक तूफान थम चुका था, और अब केवल एक गर्म, आरामदायक शांति बची थी। मैं जानता था कि यह रात हमारे रिश्ते में एक नए अध्याय की शुरुआत थी। और मैं उसके हर पल का इंतज़ार करने लगा था।
