मैं अर्जुन हूं। और यह कहानी है उस रात की, जब मैंने सोचा था कि सिर्फ एक आम वीकेंड ब्रंच होगी, लेकिन वह रात मेरी ज़िंदगी के सबसे दीवाने और मदहोश कर देने वाले अनुभव में बदल गई।
मेरा नाम अर्जुन हूडा है और मैं गुरुग्राम के सेक्टर 56 में एक स्पोर्ट्स क्लब में टेनिस कोच हूं। तीन महीने पहले, क्लब ने एक कॉर्पोरेट टूर्नामेंट आयोजित किया था, और मुझे दो महिला प्रतिभागियों के लिए डबल्स कोच के तौर पर रैंडमली असाइन कर दिया गया था। वे दोनों ही बिजनेस एनालिस्ट थीं। पहली थी रिया अहलूवालिया – लंबी, खूबसूरत, उसके लंबे काले बाल अक्सर एक हेयरबैंड में बंधे रहते थे। उसकी आंखें बादलों जैसी भूरी थीं और एक खिलंदड़ी, चंचल मुस्कान हमेशा उसके चेहरे पर तैरती रहती थी। दूसरी थी स्नेहा यादव – थोड़ी छोटे कद की, पर उसका फिगर एकदम पटाखा था। घने घुंघराले बाल, गहरी काली आंखें जो बात करते वक्त आपको गहराई से देखतीं, और एक ऐसा आत्मविश्वास जो उसकी हर हरकत से झलकता था। दोनों ही स्मार्ट, वेल-ड्रेस्ड, और उनकी पर्सनैलिटीज़ में एक मैच्योर सेक्स अपील थी जो शुरू से ही मेरा ध्यान खींच रही थी।
टूर्नामेंट के दौरान ही हमारी कैमिस्ट्री क्लिक हो गई। वे दोनों कॉम्पिटिटिव थीं, लेकिन मस्ती के लिए भी तैयार रहती थीं। एक ब्रेक के दौरान, रिया ने मुझसे पूछा था, “अर्जुन, तुम्हारी बैकहैंड स्लाइस तो बिल्कुल परफेक्ट है। कुछ टिप्स?” उसकी आवाज़ में एक नर्म, प्यार भरा सा लहजा था। स्नेहा ने पास खड़े-खड़े चुटकी ली, “हां, हां, हमें भी कुछ सीखने दो, कोच साहब।” उसने ‘कोच साहब’ शब्द को एक ऐसे अंदाज़ में कहा जो बिल्कुल इनफॉर्मल और फ्लर्टी लगा। उनकी टीम हार गई थी, लेकिन उनके चेहरे पर निराशा के बजाय मस्ती थी। मैच के बाद, मैंने सजेस्ट किया कि सेलेब्रेशन के लिए साइबरहब चलते हैं। और यहीं से हमारी रेगुलर वीकेंड ब्रंच की ट्रेडिशन शुरू हुई।
हम तीनों हर हफ्ते किसी न किसी कैफे में मिलने लगे। बातचीत हर तरह की होती – ऑफिस की गॉसिप से लेकर टेनिस, फिल्मों और लाइफ के बारे में। रिया ज्यादा बोलती थी, उसकी हंसी संगीत की तरह गूंजती थी। स्नेहा शांत रहती, लेकिन जब बोलती तो उसकी बात में दम होता। एक बार, जब मैंने अपना पानी का गिलास उठाया, तो रिया का हाथ गलती से मेरे हाथ पर आ गया। वह हाथ तुरंत हट गया, लेकिन उसकी उंगलियों का स्पर्श एक सेकंड के लिए भी मेरी त्वचा पर रोमांच सा छोड़ गया। “सॉरी,” उसने कहा, और फिर एक झिझकती सी मुस्कान दिखाई। स्नेहा ने यह सब देखा, और उसकी आंखों में एक शरारत सी झलकी, मानो वह कुछ पढ़ रही हो जो मैं अभी तक समझ नहीं पाया था।
धीरे-धीरे, बातचीत थोड़ी और पर्सनल होने लगी। वीकेंड की प्लानिंग के दौरान, स्नेहा ने एक दफा कहा, “अर्जुन तुम तो बहुत फिट रहते हो। जिम जाते हो क्या?” उसने मेरी बाजू पर नज़र डाली, जो मेरी टी-शर्ट से थोड़ी दिख रही थी। मैंने हां कहा, तो रिया ने तुरंत कमेंट किया, “दिखता है। टेनिस के अलावा और भी एक्टिविटीज़ करते होगे।” उसकी आंखों में एक चमक थी। बातें हल्की-फुल्की थीं, लेकिन हर बार जब हम मिलते, उनकी नज़रें मेरे ऊपर थोड़ी देर ठहर जातीं। एक बार जब मैं ब्रंच का बिल देने गया तो लौटकर देखा कि वे दोनों फुसफुसा रही थीं और मेरी तरफ देखकर मुस्कुरा रही थीं। मैंने पूछा, “कुछ हुआ?” तो रिया ने इनकार करते हुए कहा, “कुछ नहीं, बस तुम्हारी नई टी-शर्ट पसंद आई।” पर उसकी मुस्कान कुछ और ही कह रही थी।
फिर वह रात आई। यह कोई विशेष दिन नहीं था, बस एक और शनिवार की शाम। हमने साइबरहब के एक रेस्तरां में डिनर प्लान किया था। रिया ने एक डार्क रेड ड्रेस पहनी थी जो उके कर्व्स को बखूबी दिखा रही थी। स्नेहा ने सिंपल जींस और एक ब्लैक टॉप पहना था, जो उसके स्तनों को आकर्षक ढंग से प्रेजेंट कर रहा था। डिनर के दौरान वाइन की एक बोतल चली, और बातों का रुख धीरे-धीरे रिलेशनशिप्स की तरफ मुड़ गया। स्नेहा ने कहा, “मैंने तो अब डेटिंग एप्स से तौबा कर ली है। सब इतने फेक लगते हैं।” रिया ने सिर हिलाया, “सच कहा। असली कनेक्शन तो आमने-सामने मिलता है।” फिर उसकी नज़र मेरी तरफ उठी। वह नज़र सीधी थी, बिना किसी झिझक के। मेरा दिल ज़ोर से धड़क रहा था।
डिनर खत्म हुआ, लेकिन किसी को भी घर जाने का मन नहीं था। रिया ने सजेस्ट किया, “चलो मेरे अपार्टमेंट चलते हैं। सेक्टर 52 में है। मैंने आज ही एक नई वाइन लाई है।” स्नेहा ने तुरंत हामी भर दी। मैं भी राजी हो गया। रिया का अपार्टमेंट मॉडर्न और स्टाइलिश था। सोफे पर बैठकर हमने वाइन के दो गिलास और लिए। म्यूज़िक चल रहा था, लाइट्स मद्धम थीं। बातचीत धीमी हो गई, लेकिन हवा में तनाव बढ़ रहा था। मैं सोफे के बीच में बैठा था, रिया मेरी एक तरफ और स्नेहा दूसरी तरफ।
तभी स्नेहा ने अपना गिलास टेबल पर रखा और उसने मेरी तरफ देखा। उसकी आंखों में एक तरह की बेचैनी थी, एक ललक। रिया ने भी अपना गिलास रख दिया और धीरे से मेरे कंधे पर हाथ रख दिया। “तुम आज बहुत शांत हो, अर्जुन,” रिया ने फुसफुसाते हुए कहा। उसकी सांसें मेरे कान को छू रही थीं। मैं कुछ कहने ही वाला था कि स्नेहा ने मेरा चेहला अपनी तरफ घुमाया और उसने मेरे होंठों को अपने होंठों से छू लिया। यह कोई जबरदस्ती वाला चुंबन नहीं था, बल्कि एक कोमल, पूछती हुई सी किश थी। मेरे शरीर में एक सिहरन दौड़ गई। मैंने जवाब दिया, और तभी मैंने महसूस किया कि रिया का हाथ अब मेरे चेहरे पर है, उसकी उंगलियां मेरे गाल को सहला रही थीं। यह एक साथ दो औरतों का स्पर्श था, और यह अनुभव मेरे लिए पूरी तरह नया, अविश्वसनीय और अत्यधिक उत्तेजक था। स्नेहा के होंठ मेरे होंठों से हटे और उसने मेरी आंखों में देखा, मानो इजाज़त मांग रही हो। रिया ने मेरे कान में फुसफुसाया, “हम दोनों… तुम्हें चाहती हैं। क्या तुम…?” उसकी आवाज़ में एक बेताबी थी। मैं शब्द नहीं बोल पाया, बस धीरे से सिर हिला दिया। और फिर वह दुनिया बदल गई।
वह पल आ गया जब सारी हदें टूट गईं। रिया और स्नेहा ने एक-दूसरे की तरफ देखा, एक मूक समझौते की मुस्कान के साथ, और फिर वे दोनों मेरे करीब आ गईं। स्नेहा ने मेरी शर्ट के बटन खोलने शुरू किए, उसके हाथ हल्के थे लेकिन उद्देश्यपूर्ण। रिया ने मेरे पैंट का बेल्ट खोला। मैं बस देखता रहा, मेरा दिल धक-धक कर रहा था, मेरे शरीर में बिजली दौड़ रही थी। जैसे ही मेरा ऊपरी धड़ नंगा हुआ, रिया ने अपने होठ मेरे सीने पर रखे और एक कोमल चुंबन दिया। फिर वह नीचे की तरफ बढ़ी, उसके होंठ मेरे पेट की मांसपेशियों पर निशान छोड़ते हुए। यह एक धीमी, जानबूझकर की गई प्रक्रिया थी, हर स्पर्श में एक उद्देश्य था। इसी बीच, स्नेहा ने मेरी पैंट और अंडरवियर उतार दिए। ठंडी हवा का स्पर्श और फिर दोनों औरतों के गर्म हाथों का स्पर्श – यह संवेदनाओं का एक उफान था। स्नेहा ने मेरे लिंग को अपने हाथ में लिया, उसे धीरे से सहलाया। मेरे मुंह से एक कर्राहट-सी निकली। रिया ने नीचे देखा और फिर मेरी आंखों में देखा, एक शैतानी सी मुस्कान उसके चेहरे पर थी। फिर वह झुकी और उसने मेरे लिंग को अपने मुंह में ले लिया। यह एक गर्म, नम स्पर्श था जिसने मेरी रीढ़ की हड्डी में एक झटका दौड़ा दिया। स्नेहा ने मेरा हाथ लिया और उसे अपनी योनी की तरफ ले गई। उसकी स्कर्ट पहले ही हट चुकी थी। मैंने अपनी उंगलियों को उसकी गर्मी और नमी में महसूस किया, और वह एक कोमल आह भरकर पीछे की तरफ झुक गई। यह एक साथ दो तरह की उत्तेजना थी, और मैं खुद को संभालने की कोशिश कर रहा था।
फिर उन्होंने स्विच किया। रिया ने अपना मुंह हटाया और स्नेहा ने उसकी जगह ले ली, उसके घुंघराले बाल मेरी जांघों को छू रहे थे। इसी बीच, रिया ने खुद को मेरे चेहरे के ऊपर स्थापित किया, अपनी जांघें मेरे कंधों के दोनों ओर। उसने अपनी स्कर्ट और अंडरवियर उतार दी थी। “तुम्हारी जीभ,” उसने कहा, और उसकी आवाज़ में एक दबी हुई कामना थी। मैंने अपनी जीभ बाहर निकाली और उसे उसकी योनी के संपर्क में लाया। वह गर्म, नम, और एक हल्की सी खुशबू से भरी हुई थी। रिया ने एक लंबी आह भरी और अपने कूल्हों को हल्के से घुमाया, मेरी जीभ पर अपने भग को रगड़ते हुए। नीचे, स्नेहा का मुंह मेरे लिंग पर काम कर रहा था, उसके हाथ मेरी जांघों को दबा रहे थे। यह अविश्वसनीय था। मेरा शरीर दो अलग-अलग जगहों से आने वाली उत्तेजना से भर रहा था। रिया की सांसें तेज हो रही थीं, उसके हाथ मेरे बालों में थे। “हां… ऐसे ही,” वह फुसफुसाई।
कुछ मिनटों के बाद, रिया नीचे उतरी। उसने मेरा हाथ पकड़ा और मुझे खड़ा किया। फिर वह चारों हाथ-पैरों के बल सोफे की तरफ मुड़ी। उसकी गोल, आकर्षक गांड मेरी तरफ थी। “पीछे से,” उसने कहा, उसकी आवाज़ में एक आदेश था। मैंने उसके पीछे खड़े होकर उसे अपने में प्रवेश कराया। वह तंग और गर्म थी। मैंने धीरे-धीरे आगे बढ़ना शुरू किया, और उसने अपना सिर पीछे की ओर झुकाया, एक गहरी कराह निकाली। स्नेहा सामने आई और मेरे सामने घुटनों के बल बैठ गई। उसने मेरा चेहला पकड़ा और मुझे एक गहरे, भावुक चुंबन में डुबो दिया। उसकी जीभ मेरी जीभ से खेल रही थी। इसी दौरान, उसका एक हाथ नीचे गया और वह अपने भग को सहलाने लगी, मेरे और रिया के बीच चल रही गति के साथ तालमेल बिठाते हुए। रिया की कराहें तेज हो रही थीं, “और तेज… हां… ऐसे ही।” मैंने गति बढ़ा दी, मेरे हाथ उसकी कमर पर थे, उसे मेरी तरफ खींचते हुए।
थोड़ी देर बाद, रिया ने संकेत दिया कि वह करीब है। मैंने बाहर निकलने का फैसला किया। उन दोनों ने मुझे वापस सोफे पर लिटा दिया, मेरी पीठ के बल। स्नेहा मेरे ऊपर चढ़ गई, मेरे लिंग को अपने अंदर लेते हुए। उसने ऊपर-नीचे की गति शुरू की, उसके स्तन मेरे सीने से दब रहे थे। उसकी आंखें मेरी आंखों में जकड़ी हुई थीं, और उसके चेहरे पर एक तीव्र एकाग्रता थी। कुछ मिनटों के बाद, वह नीचे उतरी और रिया ने उसकी जगह ले ली। रिया की गति थोड़ी अधिक उग्र थी। उसने अपने हाथ मेरे सीने पर टिकाए और अपने कूल्हों को एक लयबद्ध तरीके से घुमाया। स्नेहा मेरे पास बैठ गई, उसने मेरी जांघ पर एक प्यार भरी थपकी दी, फिर एक हल्का सा प्लेफुल स्लैप। “कितना अच्छा लग रहा है उसे, देखो तो,” स्नेहा ने रिया से कहा, उसकी आवाज़ में एक शैतानीपन था। रिया ने मुस्कुराते हुए कहा, “हां, मुझे पता है।” फिर उसने मेरी तरफ देखा और फुसफुसाई, “हमें तो अभी और चाहिए। हमें दोनों को चोदना है।” उसका डर्टी टॉक मेरी उत्तेजना को चरम पर पहुंचा रहा था।
रिया का शरीर अकड़ने लगा, उसकी सांसें रुक-रुक कर आ रही थीं। वह एक लंबी, कंपकंपाती हुई आह के साथ चरम पर पहुंची, उसकी उंगलियां मेरे सीने में गड़ गईं। वह थक कर मेरे ऊपर गिर गई, फिर हांफती हुई नीचे सरक गई। स्नेहा तुरंत वापस मेरे ऊपर आ गई। उसकी सवारी अब और भी उत्सुक, और भी बेताब थी। वह अपने ऑर्गेज़म के करीब थी, और मैं भी। उसने मेरे कंधे को अपने दांतों से हल्का सा दबाया, एक लव बाइट। यह दर्द और आनंद का मिश्रण था। फिर वह रुक गई, उसका शरीर एकाएक कांपने लगा, और एक गूंजती हुई कराह उसके गले से निकल कर कमरे में भर गई। उसका ऑर्गेज़म उसके पूरे शरीर में एक लहर की तरह फैल गया। और यह देखकर, उसकी गर्मी में, उसकी आंखों में आनंद के आंसुओं को देखकर, मैं भी रुक नहीं पाया। मैंने उसे अपनी बाहों में कसकर पकड़ लिया और गहराई से अपना वीर्य उसके अंदर छोड़ दिया, एक लंबी, राहत भरी आह के साथ। मेरा शरीर ऐंठ गया, और फिर शिथिल पड़ गया।
सब कुछ शांत हो गया। सिवाय हमारी भारी सांसों के और दिल की तेज धड़कन के। स्नेहा मेरे ऊपर ही पड़ी रही, उसका सिर मेरे सीने पर टिका हुआ था। रिया हमारी तरफ सरकी और उसने अपना हाथ मेरे सीने पर रख दिया। कुछ मिनटों तक कोई बोला नहीं। मैं आसमान की तरफ देख रहा था, मेरे विचार धुंधले से थे, मेरा शरीर हर मांसपेशी से आराम महसूस कर रहा था। पहली बार रिया ने आवाज़ दी। “वाह…” उसने बस इतना ही कहा। उसकी आवाज़ में एक संतुष्टि थी। स्नेहा ने अपना सिर हिलाया, उसके बाल मेरी त्वचा को छू रहे थे। “हमने तो प्लान ही नहीं किया था,” स्नेहा ने कहा, एक हल्की हंसी के साथ। “बस… हो गया।”
मैं बोल नहीं पा रहा था। मैं सिर्फ महसूस कर रहा था। उन दोनों का शरीर मेरे शरीर से चिपका हुआ था, उनकी गर्मी, उनकी नमी। रिया ने उठकर वाइन के गिलास उठाए और हम तीनों में बांट दिए। हमने चुपचाप पिया। स्नेहा ने अंत में कहा, “अर्जुन… यह अजीब तो नहीं लगा? हम दोनों… और तुम?” उसकी आंखों में एक चिंता थी। मैंने आखिरकार अपनी आवाज़ वापस पाई। “अजीब?” मैंने कहा, “नहीं… यह… यह अद्भुत था। मैंने कभी सोचा भी नहीं था।” मेरे शब्द सच्चे थे। रिया ने मेरा हाथ थाम लिया। “हमें भी नहीं पता था कि हम यह करेंगी,” वह बोली। “लेकिन जब तुम होते हो… हम दोनों… एक अजीब सा आकर्षण महसूस करते हैं।” स्नेहा ने सहमति में सिर हिलाया। हम कुछ देर और बातें करते रहे, हल्की-फुल्की, अब बिना किसी तनाव के। वह रात खत्म होने का नाम नहीं ले रही थी। जब मैंने जाने के लिए उठने की कोशिश की तो रिया ने कहा, “रुको। रात यहीं रुको। सुबह ब्रंच पर चर्चा करेंगे।” और मैं रुक गया। उस रात, मैं उन दोनों के बीच सोया, उनकी देह की गर्मी में, उस अनुभव के मदहोश कर देने वाले अहसास के साथ जो अब तक मेरी रग-रग में समाया हुआ था। और मैं जानता था कि यह सिर्फ एक शुरुआत थी।
