मैं जबलपुर के एक कॉलेज में पढ़ता था, और उस शहर की गर्मी में मेरी ज़िंदगी भी कुछ ऐसे ही तपती रहती थी। मेरा नाम आर्यन है, और मैं यहाँ इंजीनियरिंग कर रहा हूँ। क्लासेस, प्रोजेक्ट्स, और दोस्तों के साथ घूमना—यही मेरी दिनचर्या थी। लेकिन फिर एक दिन, मेरे इंस्टाग्राम पर एक रिक्वेस्ट आई। नाम था तन्वी। प्रोफाइल पिक में वो काले लंबे बालों वाली एक लड़की थी, गोरी सी, मुस्कुराती हुई। मैंने एक्सेप्ट कर लिया। उसकी कुछ स्टोरीज़ देखीं—कॉलेज की पार्टियाँ, दोस्तों के साथ फोटोज़, और कभी-कभी कुछ उदास सी कैप्शन्स। मैंने कभी मैसेज नहीं किया। फिर एक रात, देर से स्टडी करके थका हुआ, मैंने उसकी एक स्टोरी पर रिएक्ट कर दिया। एक गाने की स्टोरी थी, मैंने हार्ट रिएक्ट कर दिया। दस मिनट बाद मेरे पास एक मैसेज आया।
“तुम्हें यह गाना पसंद आया?” तन्वी ने लिखा।
मैंने जवाब दिया, “हाँ, बहुत। तुम्हारा टेस्ट अच्छा है।”
उस दिन के बाद से बातचीत शुरू हो गई। धीरे-धीरे। पहले गाने, फिर फिल्में, फिर कॉलेज की परेशानियाँ। मुझे पता चला कि वो जबलपुर के ही एक आर्ट्स कॉलेज में थर्ड ईयर की स्टूडेंट थी। और हाँ, उसका एक बॉयफ्रेंड था। उसने कभी सीधे नहीं कहा, लेकिन उसकी स्टोरीज़ और कभी-कभार उल्लेख से पता चल जाता था। मैंने उस बारे में कभी सवाल नहीं किया। लेकिन मेरे मन में एक उत्सुकता जगी थी। वो कैसी थी? सिर्फ एक इंस्टाग्राम प्रोफाइल से कहीं ज़्यादा?
एक शाम, जब बारिश हो रही थी और मैं हॉस्टल के कमरे में अकेला बैठा था, मैंने उसे मैसेज किया, “जबलपुर में बारिश में घूमने का मज़ा ही कुछ और है।”
उसने तुरंत जवाब दिया, “तुम घूमने के शौकीन लगते हो।”
“हाँ, लेकिन अच्छी कंपनी के बिना घूमना बोरिंग है,” मैंने टाइप किया।
कुछ देर तक उस तरफ से ‘टाइपिंग…’ दिखता रहा। फिर मैसेज आया, “मिलना चाहोगे? सिविल लाइंस के वो कॉफ़ी शॉप, जहाँ लाइब्रेरी वाली जगह है?”
मेरा दिल धड़क रहा था। यह रिस्क था। उसका बॉयफ्रेंड था। लेकिन मैंने हाँ कह दिया। “कल शाम?”
“हाँ,” उसका जवाब आया।
अगले दिन शाम को मैं नर्वस था। मैंने सबसे अच्छा कपड़ा पहना—एक सादी काली टी-शर्ट और जीन्स। कॉफ़ी शॉप वाकई खूबसूरत थी, पुरानी किताबों से भरी हुई, और बाहर बारिश के बाद की साफ हवा। मैं एक कोने की सीट पर बैठ गया। पाँच मिनट बाद वो आई। इंस्टाग्राम की तस्वीरों से कहीं ज़्यादा खूबसूरत। उसने एक ऑफ-व्हाइट कुर्ता और स्किनी जीन्स पहना हुआ था, उसके काले बाल खुले हुए थे। उसकी आँखें बड़ी और काजल लगी हुई थीं। उसने मुझे देखा और एक शर्मीली सी मुस्कान उसके चेहरे पर आई।
“आर्यन?” उसने पूछा।
“हाँ। तन्वी, है ना? बैठो,” मैंने कहा।
वो मेरे सामने बैठ गई। शुरुआती कुछ मिनट अजीब से थे। हमने कॉफ़ी ऑर्डर की। फिर बातचीत शुरू हुई। कॉलेज, पढ़ाई, जबलपुर के बारे में। मैंने देखा कि जब वो बात करती थी, तो अपने हाथों से इशारे करती थी। उसकी उंगलियाँ पतली और नाज़ुक थीं। उसकी आवाज़ मधुर थी। धीरे-धीरे, वो अजनबीपन खत्म होने लगा।
“तो तुम्हारा बॉयफ्रेंड है?” मैंने अचानक पूछ लिया। सवाल मेरे मुँह से निकल गया।
वो चौंकी। उसने अपनी कॉफ़ी की चुस्की ली। “हाँ… वो दिल्ली में है। लॉ की पढ़ाई कर रहा है।”
“लंबी दूरी का रिश्ता मुश्किल होता है,” मैंने कहा।
उसने सिर हिलाया, “होता है।”
उस दिन हम दो घंटे तक बातें करते रहे। जब उठने लगे, तो बाहर अंधेरा हो चुका था। “मैं तुम्हें ड्रॉप कर देता हूँ,” मैंने कहा।
“नहीं, कोई बात नहीं। मैं ऑटो ले लूँगी,” उसने कहा, लेकिन उसकी आँखों में एक झिझक थी।
“चलो, मैं तुम्हें छोड़ आता हूँ। रात है,” मैंने ज़िद की।
वो मान गई। मेरी बाइक पर बैठते हुए उसने हल्के से मेरी कमीज़ पकड़ी। रास्ते भर हवा चल रही थी, और उसके बाल कभी-कभार मेरे गालों को छू जाते थे। उसके शरीर की गर्माहट मेरी पीठ से सटी हुई थी। मैं धीमी गति से चला रहा था, इस उम्मीद में कि रास्ता लंबा हो जाए। उसके घर के सामने बाइक रोकी। उसने हेलमेट उतारा।
“शुक्रिया,” उसने कहा।
“मज़ा आया,” मैंने जवाब दिया।
वो कुछ कहना चाहती थी, लेकिन फिर मुड़कर चली गई। उस रात मैं सो नहीं पाया। मेरे दिमाग में सिर्फ उसकी यादें घूम रही थीं।
उसके बाद हमारी बातचीत और गहरी होती गई। रोज़ रात को चैट करते। कभी-कभी फोन पर बात। एक रात उसने कहा, “मुझे लगता है तुम मेरी सबसे अच्छी दोस्त हो गए हो।”
मैंने कहा, “दोस्त? ठीक है।”
उसकी आवाज़ में एक अजीब सी कोमलता थी। मुझे पता था कि यह सिर्फ दोस्ती नहीं रह गई है। मेरे लिए भी नहीं, उसके लिए भी नहीं। लेकिन वो अपने रिश्ते के बारे में गिल्ट फील करती थी। मैंने कभी उसे दबाया नहीं। लेकिन मेरी तरफ से फ्लर्टिंग शुरू हो गई थी। कभी उसकी फोटो पर कॉम्प्लिमेंट्स, कभी उसकी बातों पर हल्की-फुल्की टीचिंग।
एक शनिवार की दोपहर, उसने मैसेज किया, “बहुत बोर हो रही हूँ। घर पर अकेली हूँ।”
मैंने तुरंत जवाब दिया, “चलो कहीं घूमने चलते हैं। भेड़ाघाट?”
भेड़ाघाट, जबलपुर का वो खूबसूरत घाट, जहाँ नर्मदा का पानी मार्बल रॉक्स के बीच बहता है। वो मान गई। हम वहाँ पहुँचे। जगह लगभग खाली थी। हम पानी के किनारे बैठ गए। हवा ठंडी थी, और आसपास सन्नाटा था।
“तुम्हारा बॉयफ्रेंड कब आ रहा है?” मैंने पूछा।
“अगले महीने,” उसने कहा, और एक लंबी सांस ली। “आर्यन, मैं कन्फ्यूज़्ड हूँ।”
“क्यों?”
“तुम्हारे साथ वक्त बिताना… यह गलत है। लेकिन मैं रुक नहीं पा रही।”
मैंने उसकी तरफ देखा। उसकी आँखों में एक तरस था। मैंने धीरे से उसका हाथ अपने हाथ में ले लिया। वो सहमी नहीं। उसने मेरी उंगलियों में अपनी उंगलियाँ भींच लीं। हम कुछ देर ऐसे ही बैठे रहे। फिर उसने अपना सिर मेरे कंधे पर रख लिया। मेरा दिल ज़ोरों से धड़क रहा था। मैंने अपना हाथ उसकी कमर पर रख दिया। वो करीब थी। उसके बालों की खुशबू मेरे नथुनों में समा रही थी।
“तन्वी,” मैंने फुसफुसाया।
“हम्म?” उसने जवाब दिया, उसकी आवाज़ सपनों जैसी।
“कुछ नहीं। बस तुम्हारा नाम लेना चाहता था।”
वो मुस्कुराई। फिर अचानक उसने अपना सिर उठाया और मेरी आँखों में देखा। उस नज़र में इतना कुछ था—डर, ललक, तड़प। मैंने अपना सिर झुकाया। हमारे चेहरे इतने करीब थे कि हमारी सांसें मिल रही थीं। लेकिन मैंने चूमा नहीं। नहीं, अभी नहीं। मैं वापस हट गया। उसकी आँखों में निराशा तैर गई, लेकिन समझ भी।
“हमें लौटना चाहिए,” मैंने कहा।
उस दिन के बाद कुछ बदल गया। हमारी बातचीत में एक नया तनाव आ गया। एक ऐसा तनाव जो मीठा था, जिसका इंतज़ार हम दोनों कर रहे थे। एक हफ्ते बाद, उसने मुझे अपने घर बुलाया। उसके पेरेंट्स आउट ऑफ स्टेशन थे। मैं गया। वो घर पर अकेली थी, एक बड़ी टी-शर्ट पहने हुए, जो उसके घुटनों तक आ रही थी। उसके पैर नंगे थे।
“अंदर आओ,” उसने कहा।
उसका घर छोटा सा और आरामदायक था। हम लिविंग रूम में सोफे पर बैठ गए। टीवी चल रहा था, लेकिन हम दोनों उस पर ध्यान नहीं दे रहे थे। मैं उसके पास बैठा था। हमारी जांघें एक दूसरे को छू रही थीं।
“तुम्हें कुछ दिखाना है,” उसने अचानक कहा, और अपना फोन निकाला।
वो मेरे और करीब सरकी। उसने फोन मेरी तरफ करके कुछ फोटोज़ दिखानी शुरू कीं—उसकी कॉलेज की एक प्रदर्शनी की तस्वीरें। लेकिन मेरा ध्यान फोन पर नहीं था। मेरी बाजू उसके शरीर से सटी हुई थी। मैंने महसूस किया कि उसने ब्रा नहीं पहनी हुई थी। उसके स्तन, उसकी टी-शर्ट के नीचे, मेरी बाजू पर हल्के से दब रहे थे। एक गर्माहट मेरे पूरे शरीर में फैल गई। मैंने देखा कि उसकी सांसें तेज़ हो रही थीं। वो भी महसूस कर रही थी। उसने फोटोज़ दिखाना जारी रखा, लेकिन उसकी आवाज़ थोड़ी काँप रही थी।
फिर वो एक वीडियो पर आई, जिसमें वो डांस कर रही थी। “ये देखो,” उसने कहा, लेकिन उसकी नज़रें मेरी आँखों पर थीं।
मैंने फोन की तरफ देखने का नाटक किया, लेकिन मेरा हाथ अपने आप उसकी पीठ पर चला गया। मैंने उसे सहलाया। वो एकदम शांत हो गई। फिर उसने फोन साइड टेबल पर रख दिया। अब कोई बहाना नहीं बचा था। हवा में सन्नाटा था, सिर्फ टीवी की आवाज़ और हमारी सांसों की आवाज़।
“आर्यन,” उसने मेरा नाम लिया, और उसकी आवाज़ में एक तरस था।
मैंने जवाब नहीं दिया। मैंने उसका चेहरा अपने हाथों में लिया और उसके होंठों को अपने होंठों से छू लिया। पहला चुंबन कोमल था, एक पूछताछ जैसा। फिर वो जवाब देने लगी। उसने मेरे होंठों को वापस दबाया। हमारा चुंबन गहरा होने लगा। मेरी जीभ ने उसके होठों की दरार को टटोला और वो खुल गए। हमारी जीभें मिलीं। उसने एक आह भरी, और उसकी आवाज़ ने मेरे अंदर की आग को हवा दी।
मैंने उसे सोफे पर ही लेटा दिया, खुद उसके ऊपर आ गया। मेरे हाथ उसकी टी-शर्ट के नीचे चले गए। उसकी त्वचा मुलायम और गर्म थी। मैंने उसके स्तनों को महसूस किया। वो भरे हुए थे, नर्म। मैंने उन्हें दबाया, और उसने कराहते हुए मेरे होंठ चूस लिए। मैंने उसकी टी-शर्ट ऊपर की ओर खींची। उसने मेरी मदद की। अब वो ऊपर से नंगी थी। उसके स्तन सुंदर थे, गोल, उनके ऊपर गहरे रंग के निप्पल। मैंने अपना मुँह उनमें से एक पर लगाया और चूसना शुरू कर दिया। उसने चीख मारी, “आह… हाँ… वहाँ…”
उसने मेरे बालों में अपनी उंगलियाँ फँसा लीं। मैं एक निप्पल से दूसरे पर जाता रहा, चूसता रहा, दाँतों से हल्का सा काटता रहा। वो बेचैन हो रही थी, अपनी कमर ऊपर उठा रही थी, मेरे क्रोच को रगड़ रही थी। मैंने अपना हाथ उसकी जीन्स के बटन तक ले जाया। उसने कोई रोक नहीं लगाई। मैंने बटन खोला, ज़िप नीचे की। मैंने अपना हाथ उसके अंदर डाला। उसकी योनी गर्म और गीली थी। मैंने उसे महसूस किया। उसने तेज आह भरी।
“अंदर… अपनी उंगली अंदर डालो,” उसने फुसफुसाया।
मैंने एक उंगली डाली। वो तंग थी। मैंने धीरे-धीरे उसे चलाना शुरू किया। उसने मेरे कान में सिसकारी भरी, “और… एक और उंगली… प्लीज।”
मैंने दो उंगलियाँ डाल दीं। उसकी कराहने की आवाज़ें तेज़ हो गईं। मैं उसे फिंगर कर रहा था, और वो मेरे होंठ चूस रही थी। फिर उसने अचानक मुझे रोका। “यहाँ नहीं… बेडरूम में चलो।”
हम उसके बेडरूम में गए। कमरा उसकी तरह ही खूशबूदार था। हम बिस्तर पर गिरे। अब हम दोनों नंगे थे। उसका शरीर चाँदी की तरह चमक रहा था। मैं उस पर था। मैंने अपना लिंग उसकी योनी के द्वार पर रखा।
“रुको,” उसने कहा। उसने मेरा लिंग अपने हाथ में लिया और उसे सहलाया। फिर वो नीचे की ओर सरकी और उसे अपने मुँह में ले लिया।
मैं कराह उठा। उसका मुँह गर्म और नम था। वो मेरे लिंग को चूस रही थी, अपनी जीभ से उसके सिरे को लपेट रही थी। मैंने उसके बाल पकड़ लिए। “तन्वी… यह बहुत अच्छा है…”
वो और गहराई तक ले गई, फिर वापस आई। उसने मुझे देखा, उसके होंथों पर मेरा प्री-कम लगा हुआ था। “मैं तुम्हारा सारा जूस पी जाऊँगी,” उसने कहा, और फिर से चूसना शुरू कर दिया।
कुछ मिनट बाद मैंने उसे रोका। “बस… नहीं तो मैं निकल जाऊँगा।”
वो मुस्कुराई। मैंने उसे पीठ के बल लिटा दिया और अपने घुटनों के बल उसके बीच में आ गया। मैंने अपना लिंग उसकी योनी के द्वार पर फिर से रखा, और धीरे से अंदर धकेलना शुरू किया। वो तंग थी। उसने अपनी आँखें बंद कर लीं, और उसके होठों से एक लंबी सिसकारी निकली।
“आह… आर्यन… यह बहुत बड़ा है…”
“रिलैक्स करो, बेबी,” मैंने कहा, और धीरे-धीरे पूरा अंदर तक चला गया।
जब मैं पूरी तरह अंदर था, तो हम दोनों स्थिर हो गए। उसकी आँखों में आंसू थे। “ओह माई गॉड,” उसने फुसफुसाया।
फिर मैंने चलाना शुरू किया। धीमी, गहरी थ्रस्ट्स। हर थ्रस्ट के साथ वो कराह उठती। मैंने उसके स्तन दबाए, उन्हें मरोड़ा। उसने मेरे कंधे पर अपने नाखून गड़ा दिए। गति बढ़ने लगी। अब मैं तेज़ी से चला रहा था। बिस्तर की चौखट दीवार से टकराने लगी। उसकी चीखें और तेज़ हो गईं।
“हाँ! हाँ! वहाँ! ठीक वहाँ!” वो चिल्लाई।
मैंने उसे पलट दिया। डॉगी स्टाइल। मैंने उसकी गांड को पकड़ा और फिर से अंदर घुसा। इस पोजीशन में मैं और गहराई तक जा सका। वो चिल्ला रही थी, “मेरी गांड मारो! हाँ! तुम मुझे चोदो!”
उसकी गंदी बातें सुनकर मेरा खड़ा और सख्त हो गया। मैंने उसकी गांड पर जोर से थप्पड़ मारा। उसने चीख मारी। “और! मुझे और मारो!”
मैंने कई थप्पड़ मारे। उसकी गांड लाल हो गई थी। फिर मैंने उसे फिर से पलटा। मैं उस पर था, लेकिन उसने मुझे ऊपर धकेल दिया। “मैं ऊपर आना चाहती हूँ,” उसने कहा।
वो मेरे ऊपर बैठ गई, मेरा लिंग अपने अंदर लेते हुए। उसने अपने हाथ मेरे सीने पर रखे और ऊपर-नीचे होने लगी। उसके स्तन हवा में उछल रहे थे। मैंने उन्हें पकड़ लिया और निप्पल चूसने लगा। वो तेज़ी से ऊपर-नीचे हो रही थी, अपने आप को मेरे ऊपर भिड़ा रही थी। उसका चेहरा एकदम भावविहीन हो गया था, सिर्फ आनंद का भाव था।
फिर उसने कहा, “वो वाला पोजीशन करते हैं… जो तुमने कहा था… आयरन शेफ?”
मैं हँसा। “आयरन चेफ। हाँ।”
मैं बिस्तर के किनारे बैठ गया। उसने मेरे सामने घुटनों के बल बैठकर मेरा लिंग फिर से अपने मुँह में ले लिया, कुछ सेकंड के लिए। फिर वो उठी और अपनी पीठ मेरी तरफ करके, मेरे लिंग पर बैठ गई। इस पोजीशन में उसकी पीठ मेरे सीने से सटी हुई थी, और मैं उसके कान तक पहुँच सकता था। मैंने उसके कान को चूसा। उसने सिर हिलाया। मैंने उसकी कमर पकड़ी और उसे ऊपर-नीचे करने में मदद की। वो पीछे की ओर झुक गई, अपना सिर मेरे कंधे पर रख लिया।
“मैं कम होने वाली हूँ,” उसने हांफते हुए कहा।
“मैं भी,” मैंने कहा।
मैंने उसके स्तनों को मरोड़ा, और उसने चीख मारी। उसकी योनी मेरे लिंग के इर्द-गिर्द सिकुड़ने लगी। वो ऑर्गैज़्म की लहरों में बहने लगी। उसकी कराहें तेज़ और लगातार हो गईं। यह देखकर मैं भी रुक नहीं सका। मैंने उसे कसकर पकड़ा और अपना सारा तरल उसके अंदर गिरा दिया। मैंने एक लंबी, गहरी आह भरी।
हम दोनों सांस भरते हुए वैसे ही बैठे रहे। फिर वो मेरे ऊपर से उतरी और बिस्तर पर लेट गई। मैं उसके बगल में लेट गया। हमारे शरीर चिपके हुए थे, पसीने से तर।
कुछ देर बाद उसने कहा, “यह गलत था।”
मैं चुप रहा।
“लेकिन मैं दोबारा करूँगी,” उसने कहा, और मेरी तरफ मुड़कर देखा।
मैंने उसे चूमा। “मैं भी।”
उस दिन के बाद हमारा रिश्ता बदल गया। हम अक्सर मिलने लगे। कभी उसके घर, कभी किसी लॉज में। हर बार की मुलाकात पहले से ज़्यादा तीव्र होती जाती। हमारे बीच सिर्फ शारीरिक आकर्षण नहीं था, एक भावनात्मक जुड़ाव भी गहरा होता जा रहा था। लेकिन उसका बॉयफ्रेंड एक सच्चाई थी जिससे हम मुँह नहीं मोड़ सकते थे।
एक रात, जब हम एक सस्ते लॉज के कमरे में थे, उसने कहा, “वो कल आ रहा है।”
मेरा दिल एकदम थम सा गया। “कितने दिन के लिए?”
“एक हफ्ता।”
मैं चुप हो गया।
“मैं उससे ब्रेक अप नहीं कर सकती, आर्यन। वो एक अच्छा लड़का है। और उसके पेरेंट्स मेरे पेरेंट्स को जानते हैं। यह सब बहुत कॉम्प्लिकेटेड है,” उसने कहा, उसकी आवाज़ में दर्द था।
“तो फिर हम क्या कर रहे हैं?” मैंने पूछा।
“मैं नहीं जानती। मैं सिर्फ जानती हूँ कि जब तुम मेरे साथ होते हो, तो मैं ज़िंदा महसूस करती हूँ।”
उस रात हमारा सेक्स हिंसक था। गुस्से में, बेचैनी में। हमने एक दूसरे को चोट पहुँचाई, चिल्लाए, रोए। जब खत्म हुआ, तो हम दोनों थक कर चूर हो गए थे।
अगले दिन वो चली गई। उसका बॉयफ्रेंड आ गया था। मैंने उसे एक हफ्ते तक कोई मैसेज नहीं किया। वो भी चुप रही। फिर एक रात, देर रात, मेरे फोन की घंटी बजी।
“हैलो?” मैंने कहा।
फोन के दूसरी तरफ सन्नाटा था। फिर उसकी आवाज़ आई, रोती हुई। “मैं उसके साथ नहीं रह सकती। मैं तुम्हारे बारे में सोचती रहती हूँ।”
“तन्वी…”
“मिलो मुझसे। कल। वही लॉज।”
मैं मान गया।
कल आया। मैं लॉज के कमरे में उसका इंतज़ार कर रहा था। वो आई। उसकी आँखें सूजी हुई थीं। उसने सीधे मेरे पास आकर मुझे जकड़ लिया। हम चूमने लगे। यह चुंबन उमड़ते हुए दर्द और तड़प का था। हमने कपड़े उतारे। इस बार कोई फोरप्ले नहीं था। मैंने उसे बिस्तर पर लिटाया और सीधे अंदर घुस गया। वो रो रही थी, लेकिन उसकी बाँहें मुझे कसकर पकड़े हुए थीं।
“मुझे माफ कर दो,” वो बार-बार कहती रही।
“शुश,” मैंने कहा, और उसे चूमते हुए तेज़ी से चलाना शुरू कर दिया।
वो रात हमारी आखिरी मुलाकात थी। उसने कहा कि वो अपने बॉयफ्रेंड को सब कुछ बता देगी और उससे अलग हो जाएगी। लेकिन मैं जानता था कि ऐसा नहीं होगा। दुनिया इतनी आसान नहीं है। जबलपुर जैसे छोटे शहर में, जहाँ हर कोई हर किसी को जानता है, स्कैंडल आसानी से फैल जाते हैं।
कुछ हफ्ते बाद, मैंने देखा कि उसकी इंस्टाग्राम प्रोफाइल पर एक नई तस्वीर आई है—उसका और उसके बॉयफ्रेंड का एक साथ फोटो, दोनों मुस्कुरा रहे थे। कैप्शन था: “हैप्पी एनिवर्सरी माय लव।”
मैंने उसे अनफॉलो कर दिया। मैंने उसका नंबर डिलीट कर दिया। लेकिन रातों को, जब अंधेरा होता है, मैं अब भी उसकी यादों में खो जाता हूँ। उसकी खुशबू, उसकी आहें, उसके होंठों का स्वाद। और मैं खुद से सवाल करता हूँ—क्या यह सब सिर्फ एक फ्लिंग था? या कुछ और? शायद मैं कभी नहीं जान पाऊँगा। जबलपुर की गर्मियाँ अब भी उतनी ही तपती हैं, लेकिन मेरे अंदर एक ठंडक बस गई है। एक ऐसी ठंडक जो शायद कभी नहीं जाएगी।
