उसकी बेरुखी का बदला, रूममेट की बाँहों में सुलगती एक रात

पुणे की वह मानसून वाली दोपहर थी। खिड़की के बाहर शिवजीनगर की सड़कें पानी से लबालब भरी थीं और हवा में मिट्टी की वह सोंधी खुशबू घुली थी जो सिर्फ इस शहर में महसूस की जा सकती है। मैं, समीर कुलकर्णी, अपने कमरे के सोफे पर पसरा हुआ था और लैपटॉप पर कुछ काम करने की कोशिश कर रहा था, लेकिन मेरा ध्यान बार-बार कमरे के दूसरे कोने में जा रहा था।
वहाँ ऋतुजा जोशी खड़ी थी। ऋतुजा, मेरे रूममेट अक्षय पाटिल की गर्लफ्रेंड। वह कद में काफी छोटी थी, लेकिन उसका व्यक्तित्व पूरे कमरे को भर देता था। उसने एक टाइट फिटिंग वाली सफेद कुर्ती और नीली जींस पहनी थी। जब वह अलमारी से कुछ ढूंढने के लिए थोड़ा झुकी, तो उसकी जींस उसके भारी और गोल कूल्हों पर इतनी खिंच गई कि मुझे लगा वह अभी फट जाएगी। उसकी कमर पतली थी, लेकिन उसके नीचे का हिस्सा—वह विशाल, मांसल गांड—किसी भी मर्द का ध्यान भटकाने के लिए काफी थी। वह जब चलती थी, तो उसके कूल्हे एक लय में हिलते थे, जैसे कोई संगीत बज रहा हो।
“समीर, क्या तुमने अक्षय का चार्जर देखा है?”
उसने पलटकर मुझसे पूछा। उसकी आवाज़ में एक अजीब सी खनक थी, लेकिन आज उसमें कुछ और भी था—एक तरह की झुंझलाहट।
“नहीं तो, शायद उसने अपने बैग में रखा होगा,” मैंने जवाब दिया, जबकि मेरी नज़रें अभी भी उसके उन कर्व्स पर जमी थीं।
ऋतुजा ने एक गहरी सांस ली और अपने बालों को झटकते हुए मेरे करीब आई। वह इतनी छोटी थी कि उसे मेरी तरफ देखने के लिए अपनी गर्दन थोड़ी ऊपर उठानी पड़ती थी, जिससे उसकी गर्दन की गोरी त्वचा और उसके गले की बारीक नसें साफ दिख रही थीं।
“वह लड़का सच में पागल है। उसे लगता है कि दुनिया उसके इशारों पर नाचती है,” ऋतुजा ने बड़बड़ाते हुए कहा।
मैं मुस्कुराया। अक्षय वाकई स्मार्ट था, टॉप यूनिवर्सिटी का टॉपर और हर लड़की की क्रश। लेकिन यही उसकी समस्या थी। वह जितना स्मार्ट था, उतना ही लापरवाह भी।
“क्या हुआ? फिर से वही लड़ाई?” मैंने पूछा।
“लड़ाई? नहीं, समीर। लड़ाई तब होती है जब सामने वाला अपनी गलती माने। आज हम एफसी रोड पर थे, उस कैफे में। तुम जानते हो न, वह जिस भी ग्रुप के साथ बैठता है, लड़कियाँ उसके चारों ओर ऐसे मंडराती हैं जैसे वह कोई सेलिब्रिटी हो। और अक्षय? उसे यह सब पसंद है। वह बस मुस्कुराता रहता है और उन लड़कियों की फ्लर्टिंग का आनंद लेता है।”
ऋतुजा के चेहरे पर जलन साफ दिख रही थी। वह बुद्धिमान थी, समझदार थी, लेकिन जब बात अक्षय की आती थी, तो उसकी ईर्ष्या उसे अंधा कर देती थी। वह उन लड़कियों से नफरत नहीं करती थी, बल्कि वह इस बात से जलती थी कि अक्षय को दूसरों का ध्यान इतना पसंद है।
“वह बस मिलनसार है, ऋतुजा,” मैंने उसे शांत करने की कोशिश की, हालांकि मुझे पता था कि यह काम नहीं करेगा।
“मिलनसार? समीर, जब एक लड़की उसकी बांह पर हाथ रखती है और वह उसे हटाता नहीं है, तो उसे मिलनसार नहीं, बल्कि बेशर्म कहते हैं,” उसने गुस्से में कहा और अचानक मेरी आँखों में देखा।
उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी। वह जलन अब धीरे-धीरे एक अलग दिशा में मुड़ रही थी। उसने मुझे ऊपर से नीचे तक देखा। मैं अक्षय जैसा ‘परफेक्ट’ नहीं था, लेकिन मैं उसकी तुलना में ज्यादा शांत और शायद ज्यादा ‘उपलब्ध’ था।
“वैसे, तुम काफी चुप रहते हो, समीर। क्या तुम्हें कभी ऐसा महसूस नहीं होता कि तुम्हें भी थोड़ा ध्यान मिलना चाहिए?” उसने एक शरारती मुस्कान के साथ पूछा।
उसकी आवाज़ अब धीमी और रेशमी हो गई थी। वह अब मेरे बहुत करीब खड़ी थी। मैं उसकी परफ्यूम की खुशबू महसूस कर सकता था—मोगरे और कुछ मीठे फूलों का मिश्रण।
“मुझे ध्यान की ज़रूरत नहीं है, ऋतुजा,” मैंने धीमी आवाज़ में कहा।
“सच में? या फिर तुम्हें बस सही मौके का इंतज़ार है?”
उसने अपना हाथ धीरे से मेरे कंधे पर रखा। उसकी उंगलियाँ हल्की थीं, लेकिन उनका स्पर्श मेरी त्वचा पर बिजली की तरह दौड़ा। वह जानबूझकर ऐसा कर रही थी। वह अक्षय को सबक सिखाना चाहती थी, या शायद वह यह देखना चाहती थी कि वह कितनी पावर रखती है। वह ईर्ष्या, जो पहले अक्षय के प्रति थी, अब एक खेल में बदल रही थी।
अगले कुछ दिनों तक यह खेल चलता रहा। हम अक्सर कोथरुड और जेएम रोड की गलियों में साथ घूमते थे जब अक्षय अपने किसी प्रोजेक्ट में व्यस्त होता था। ऋतुजा का व्यवहार मेरे प्रति पूरी तरह बदल चुका था। वह अब मुझसे बातें करते समय ज्यादा करीब आती थी। कभी वह चलते-चलते अपना हाथ मेरी कमर पर रख देती, तो कभी भीड़भाड़ वाली जगह पर वह जानबूझकर मेरे सामने आती और अपने भारी कूल्हों को मेरे पैरों से सटा देती।
एक शाम हम करवे नगर के एक छोटे से कॅफे पर थे। बारिश फिर से शुरू हो गई थी, और हम एक छोटे से छतरी के नीचे सिमटे हुए थे।
“समीर, तुम बहुत अलग हो,” उसने फुसफुसाते हुए कहा।
“अलग कैसे?”
“तुम सुनते हो। अक्षय सिर्फ बोलता है। वह अपनी उपलब्धियों के बारे में बात करता है, लेकिन तुम… तुम मुझे देखते हो। असल में देखते हो।”
उसने मेरी ओर देखा, और इस बार उसकी आँखों में जलन नहीं, बल्कि एक गहरी प्यास थी। उसने धीरे से अपना हाथ मेरे हाथ पर रखा और अपनी उंगलियों को मेरी हथेली पर रगड़ने लगी। वह स्पर्श जानबूझकर उत्तेजक था।
“ऋतुजा, यह गलत है। अक्षय हमारा दोस्त है,” मैंने कहा, हालांकि मेरी आवाज़ में कोई दम नहीं था। मेरी पूरी देह उसके स्पर्श से कांप रही थी।
“गलत क्या है? वह उन लड़कियों को अपनी तरफ खींचता है, मैं बस अपनी खुशी ढूंढ रही हूँ। क्या यह इतना गलत है कि मैं किसी ऐसे इंसान के साथ समय बिताऊं जो मुझे अहमियत दे?”
उसने अपनी देह को मेरी ओर झुकाया। उसकी छोटी कद-काठी के कारण उसकी छाती सीधे मेरे सीने से टकराई। वह बहुत नरम थी, और उसकी साँसें मेरी गर्दन पर महसूस हो रही थीं।
“तुम बहुत खतरनाक हो, ऋतुजा,” मैंने उसकी कमर को कसकर पकड़ते हुए कहा।
उसकी कमर पतली थी, लेकिन जैसे ही मेरा हाथ नीचे की ओर गया, मेरी उंगलियाँ उसके उन विशाल और ठोस कूल्हों से टकराईं। वह हल्का सा सिहर उठी और उसके होंठों से एक दबी हुई आह निकली।
“खतरनाक? या शायद मैं बस वह हूँ जो तुम हमेशा से चाहते थे?” उसने शरारत से कहा और अपनी जीभ से अपने निचले होंठ को धीरे से चाटा।
तनाव अब इतना बढ़ गया था कि हवा भारी महसूस होने लगी थी। हम दोनों जानते थे कि यह कहाँ जा रहा है। यह सिर्फ ईर्ष्या नहीं थी, यह एक आकर्षण था जो धीरे-धीरे आग का रूप ले रहा था।
एक शनिवार की दोपहर, अक्षय को किसी काम से विमान नगर जाना पड़ा। उसने कहा कि वह रात तक वापस आएगा। घर में सिर्फ मैं और ऋतुजा थे। बाहर मूसलाधार बारिश हो रही थी, और घर के अंदर की खामोशी हमें बेचैन कर रही थी।
ऋतुजा लिविंग रूम में सोफे पर लेटी हुई एक किताब पढ़ रही थी, लेकिन उसका ध्यान किताब पर नहीं था। उसने एक बहुत ही छोटी शॉर्ट ड्रेस पहनी थी, जो उसके शरीर से चिपकी हुई थी। जब वह लेटी थी, तो उसकी ड्रेस और ऊपर चढ़ गई थी, जिससे उसकी जांघों का गोरापन और उसकी बड़ी गांड का उभार साफ दिख रहा था।
मैं किचन में पानी पी रहा था और उसे देख रहा था। मेरी प्यास अब पानी से नहीं, बल्कि उस औरत से थी।
“समीर, क्या तुम मेरी मदद करोगे?” उसने किताब बंद करते हुए कहा।
“किस चीज में?”
“मेरी पीठ में बहुत दर्द है। क्या तुम थोड़ा मसाज कर दोगे?”
उसने अपनी ड्रेस के कंधे वाले हिस्से को थोड़ा नीचे खिसकाया, जिससे उसकी सफेद, मखमली त्वचा चमकने लगी। वह जानती थी कि वह क्या कर रही है।
मैं धीरे-धीरे उसके पास गया। जैसे ही मैं उसके पीछे बैठा, मेरी धड़कनें तेज़ हो गईं। मैंने अपने हाथ उसकी गर्दन और कंधों पर रखे। उसकी त्वचा रेशम की तरह मुलायम और गर्म थी।
“यहाँ?” मैंने पूछा।
“हाँ… थोड़ा और नीचे… समीर, धीरे…” उसने अपनी आँखें बंद कर लीं और अपना सिर पीछे की ओर झुका दिया।
जैसे-जैसे मेरे हाथ नीचे की ओर बढ़े, मैंने महसूस किया कि उसका शरीर तनाव में था। जब मेरी हथेलियाँ उसकी कमर के निचले हिस्से पर पहुँचीं, तो उसने एक गहरी साँस ली। मैंने धीरे से अपने हाथों को उसके उन विशाल कूल्हों पर फैलाया। वे इतने भरे हुए और मांसल थे कि मेरी उंगलियाँ उनमें धंस रही थीं।
“ओह गॉड, समीर…” उसने फुसफुसाते हुए कहा।
मैंने अपना चेहरा उसकी गर्दन के पास लाया और धीरे से उसकी त्वचा को चूमना शुरू किया। वह कांपने लगी। उसने पलटकर मुझे देखा, और उसकी आँखों में अब सिर्फ वासना थी। उसने बिना कुछ कहे मेरा हाथ पकड़ा और उसे अपनी ड्रेस के अंदर, अपनी जांघों के बीच ले गई।
वहाँ वह पहले से ही गीली थी। उसकी पेंटी पूरी तरह से भीग चुकी थी।
“मैं बहुत देर से इस पल का इंतज़ार कर रही थी,” उसने हाफते हुए कहा।
मैंने उसे झटके से अपनी ओर खींचा और उसके होंठों को अपने होंठों से दबा दिया। यह एक हिंसक और भूखा चुंबन था। हमारी जीभें आपस में उलझ गईं, और हम एक-दूसरे का लार सोखने लगे। वह मेरे बालों को कसकर पकड़ रही थी, जैसे वह मुझे अपने अंदर समा लेना चाहती हो।
मैंने उसकी ड्रेस को ऊपर की ओर खींच दिया, जिससे उसकी वह शानदार गांड पूरी तरह से सामने आ गई। वह इतनी गोल और भारी थी कि वह किसी सपने जैसी लग रही थी। मैंने अपने दोनों हाथों से उसके कूल्हों को जोर से भींचा, और वह जोर से कराह उठी।
“समीर… प्लीज… अब और नहीं,” उसने मेरी शर्ट के बटन खोलते हुए कहा।
मैंने उसे उठाकर बेडरूम की ओर ले गया और उसे बिस्तर पर पटक दिया। वह बिस्तर पर बिखरी हुई थी, उसकी छोटी देह और बड़े कर्व्स एक अद्भुत विरोधाभास पैदा कर रहे थे। मैंने अपनी पैंट उतारी और मेरा सख्त, तना हुआ लिंग बाहर आ गया, जो पूरी तरह से उत्तेजित था।
उसने मेरी तरफ देखा और उसकी आँखों में एक चमक थी। उसने धीरे से अपना हाथ बढ़ाया और मेरे लिंग को अपनी उंगलियों से छुआ।
“कितना बड़ा और सख्त है यह,” उसने धीमी आवाज़ में कहा और फिर उसे अपनी जीभ से चाटना शुरू कर दिया।
उसकी जीभ का स्पर्श, वह गीलापन और उसका चूसने का तरीका मुझे पागल कर रहा था। उसने मेरे लिंग के ऊपरी हिस्से को अपने मुँह में लिया और उसे गहराई से चूसने लगी। चूसने की वह ‘श्लुप-श्लुप’ की आवाज़ कमरे की खामोशी में गूँज रही थी। वह बहुत अनुभवी लग रही थी, उसका मुँह गर्म था और उसकी जीभ मेरे लिंग के चारों ओर घूम रही थी।
मैंने उसे अपने मुँह से बाहर निकाला और उसे अपनी पीठ के बल लिटा दिया। मैंने उसके पैरों को फैलाया और उसकी गीली पेंटी को एक झटके में उतार दिया। उसकी योनि पूरी तरह से खुली हुई थी, गुलाबी और रस से तरबतर। उसके छोटे और मोटे होंठों से कामुक तरल पदार्थ धीरे-धीरे नीचे गिर रहा था।
मैंने अपनी उंगली उसकी योनि के अंदर डाली। वह इतनी तंग थी कि मेरी उंगली को जोर से जकड़ लिया।
“आह! समीर… यह बहुत अच्छा लग रहा है,” उसने अपनी कमर को ऊपर उठाते हुए कहा।
मैंने अपनी दूसरी उंगली भी अंदर डाली और उन्हें अंदर-बाहर करना शुरू किया। ‘स्क्वेल्च-स्क्वेल्च’ की आवाज़ आने लगी क्योंकि वह बहुत अधिक गीली थी। वह अपनी आँखें बंद करके कराह रही थी, और उसके छोटे हाथ बिस्तर की चादर को कसकर जकड़े हुए थे।
अब मैं और इंतज़ार नहीं कर सकता था। मैंने अपना लिंग उसकी योनि के द्वार पर रखा और धीरे से अंदर धकेलना शुरू किया। वह इतनी तंग थी कि मुझे अंदर जाने के लिए जोर लगाना पड़ा।
“ओह… समीर… तुम बहुत बड़े हो… आह!” उसने जोर से चिल्लाकर मेरी पीठ पर अपने नाखून गड़ा दिए।
जैसे ही मैं पूरी तरह से उसके अंदर समा गया, हम दोनों ने एक साथ एक गहरी साँस ली। वह अहसास अविश्वसनीय था। वह बहुत गर्म और तंग थी, जैसे वह मुझे पूरी तरह से निगल लेना चाहती हो।
मैंने धीरे-धीरे धक्का देना शुरू किया। हर बार जब मैं अंदर जाता, तो उसके मांसल कूल्हे बिस्तर से टकराते थे, जिससे एक ‘थैप-थैप’ की आवाज़ आ रही थी। उसकी वह बड़ी गांड हर धक्के के साथ ऊपर-नीचे उछल रही थी, जो देखने में बेहद कामुक लग रहा था।
“और जोर से… समीर, मुझे और जोर से चाहिए!” वह चिल्लाई।
मैंने उसकी गति बढ़ा दी। अब मैं पूरी ताकत से उसके अंदर घुस रहा था। ‘श्लिक-श्लिक’ की आवाज़ तेज़ हो गई क्योंकि हमारा शरीर एक-दूसरे से बुरी तरह रगड़ रहा था। पसीना हमारी देहों से बह रहा था, जिससे हम और भी ज्यादा फिसलने लगे।
उसकी योनि की दीवारें मेरे लिंग को इतनी मजबूती से जकड़ रही थीं कि मुझे लगा मैं अभी फट जाऊँगा। मैंने उसे पलट दिया और उसे घुटनों के बल खड़ा कर दिया। अब उसकी वह विशाल गांड मेरे चेहरे के ठीक सामने थी। वह इतनी बड़ी और गोल थी कि उसने मेरा पूरा दृश्य भर दिया।
मैंने अपने हाथों से उसके कूल्हों को फैलाया और पीछे से एक जोरदार धक्का दिया।
“आहहह! समीर!” वह चीखी, उसकी आवाज़ में सुख और दर्द का एक मिश्रण था।
पीछे से प्रवेश करना और भी अधिक गहरा था। मैं महसूस कर सकता था कि मेरा लिंग उसके गर्भाशय ग्रीवा (cervix) को छू रहा है। हर धक्के के साथ उसके स्तन आगे की ओर लटक रहे थे और उसके कूल्हे मेरी जांघों से टकरा रहे थे।
“तुम… तुम अक्षय से कहीं बेहतर हो,” उसने हाफते हुए कहा।
यह बात सुनकर मेरी उत्तेजना और बढ़ गई। मैंने उसे और भी अधिक तीव्रता से झकझोरा। मैं अब पूरी तरह से बेकाबू था। उसके शरीर की गंध, उसकी कराहें और उसकी उस भारी गांड का उछाल मुझे चरम सीमा की ओर ले जा रहा था।
अचानक, ऋतुजा का शरीर अकड़ने लगा। उसकी साँसें तेज़ हो गईं और उसने जोर से मेरा हाथ पकड़ा।
“मैं… मैं आने वाली हूँ… समीर! आहहह!”
उसकी योनि ने मेरे लिंग को इतनी जोर से भींचा कि मैं भी अपनी चरम सीमा पर पहुँच गया। मैंने एक आखिरी, सबसे गहरा धक्का दिया और अपना सारा वीर्य उसके अंदर छोड़ दिया।
“ओह गॉड… यस!” मैं चिल्लाया और उसके ऊपर गिर पड़ा।
हम दोनों हाँफ रहे थे। कमरे में केवल हमारी तेज़ साँसों की आवाज़ थी। मेरा लिंग अभी भी उसके अंदर था, और मैं महसूस कर सकता था कि वह धीरे-धीरे सिकुड़ रही थी।
कुछ मिनटों बाद, मैंने धीरे से खुद को बाहर निकाला। वीर्य और योनि के रस का एक मिश्रण धीरे-धीरे उसके पैरों से नीचे गिर रहा था। वह वहीं लेटी हुई थी, उसकी आँखों में एक अजीब सी संतुष्टि और शांति थी।
“समीर,” उसने धीमी आवाज़ में कहा।
“हूँ?”
“यह हमारा राज़ रहेगा, है ना?” उसने मुस्कुराते हुए पूछा।
मैंने उसके माथे को चूमा और उसे अपनी बाहों में भर लिया।
“बिल्कुल।”
जब अक्षय रात को वापस आया, तो वह हमेशा की तरह अपनी किसी नई उपलब्धि के बारे में बात कर रहा था। ऋतुजा उसकी बातें सुन रही थी और बीच-बीच में मुस्कुरा रही थी। लेकिन जब उसकी नज़र मुझसे मिली, तो उसकी आँखों में वह शरारत और वह वासना अभी भी थी।
उसने अक्षय की ओर देखा और फिर मेरी ओर। अब वह अक्षय की ईर्ष्या से नहीं जल रही थी, बल्कि वह इस बात का आनंद ले रही थी कि उसके पास कुछ ऐसा था जो अक्षय के पास नहीं था—एक ऐसा राज़ जिसने उसे और भी अधिक शक्तिशाली और कामुक बना दिया था।
पुणे की वह बारिश अभी भी जारी थी, लेकिन घर के अंदर का माहौल अब पूरी तरह बदल चुका था। हम तीनों एक ही छत के नीचे थे, लेकिन ऋतुजा और मेरे बीच एक ऐसा पुल बन गया था जिसे पार करना अक्षय के बस की बात नहीं थी। वह छोटी सी लड़की, जिसकी बड़ी गांड ने मेरा चैन छीन लिया था, अब मेरी सबसे गहरी और सबसे गंदी लत बन चुकी थी।