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लौंज की वह सर्द रात और हमारी गर्म सांसें
“इतनी गंभीर किताब पढ़कर सफर मज़ेदार कैसे बनता है?” यह सवाल उस लड़की ने पूछा था, जो बस के अगले स्टॉप पर चढ़कर बिल्कुल मेरी बगल वाली सीट पर आ बैठी थी। उसका नाम वैदेही था। उसने हल्के क्रीम रंग का एक ढीला कुर्ता पहना था, जिसमें उसकी गोरी रंगत और उभरते हुए घुमाव साफ…
