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त्रिकोण का जाल: धोखा, चाहत और पछतावा
मैं अपने केबिन की बड़ी सी खिड़की के पास खड़ी बाहर सूरत की भागती-दौड़ती सड़कों को देख रही थी। मेरी सिल्क की साड़ी का पल्लू कंधे से हल्का सा फिसल गया था, पर मेरा ध्यान वहां नहीं था। मेरी पूरी दुनिया इस वक्त मेरे फोन की स्क्रीन पर सिमट गई थी, जहाँ ट्विटर और न्यूज़…
